शिक्षा और चिकित्सा ही समाज की रीढ़ : राज्यपाल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन &lpar;PSACWA&rpar; का राष्ट्रीय मुख्यालय एक ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बना&comma; जब देशभर के निजी स्कूलों में कार्यरत नर्सरी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए भारत सरकार के कौशल विकास मंत्रालय &lpar;MEDE&rpar; और PSACWA के बीच हुए बहुप्रतीक्षित MOU पर आधारित राष्ट्रीय प्रशिक्षण अभियान की विधिवत शुरुआत की गई। इस गौरवशाली आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे बिहार के माननीय राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान&comma; साथ ही डॉ अब्दुल अहमद हई&comma; फादर पीटर&comma; डॉ एस पी वर्मा एवं एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यकम का शुभ आरंभ किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्यपाल के भाषण की विशेष झलकियाँ&colon;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार के माननीय राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान जी ने अपने भाषण में ना केवल इस ऐतिहासिक MoU की सराहना की&comma; बल्कि स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग में बिहार को पहला राज्य बनने पर शुभकामनाएं एवं फौजिया खान को सर्वप्रथम नामांकन करवाने हेतु बधाई और सम्मान दिया। बिहार के कोने कोने से आए हुए अन्य शिक्षकों को भी कीट देकर सम्मानित किया गया &comma;शिक्षकों को भारत की शिक्षा व्यवस्था&comma; सांस्कृतिक विरासत और निजी स्कूलों की भूमिका को लेकर एक विस्तृत चिंतन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा&comma; शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है। शिक्षा वह शक्ति है&comma; जो व्यक्ति को आत्मबोध&comma; नैतिक बल और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा के हर समाज की असली रीढ़ दो ही वर्ग होते हैं — शिक्षक और चिकित्सक। एक तन को स्वस्थ करता है और दूसरा मन को। अगर ये दोनों वर्ग संस्कारित&comma; शिक्षित और समर्थ हों&comma; तो राष्ट्र को कोई पराजित नहीं कर सकता।”<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्यपाल महोदय ने यह भी कहा कि भारत के निजी विद्यालयों की भूमिका आज की परिस्थिति में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने PSACWA द्वारा लिए गए इस साहसिक एवं दूरदर्शी निर्णय की सराहना करते हुए कहा&colon;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&OpenCurlyDoubleQuote;निजी विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान नहीं करते&comma; बल्कि वे करोड़ों छात्रों और शिक्षकों के जीवन को दिशा देते हैं। यह MoU यह सुनिश्चित करता है कि प्रारंभिक शिक्षा – जो किसी भी छात्र के व्यक्तित्व का आधार है – उसमें गुणवत्ता&comma; प्रशिक्षण और मूल्य आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित हो सके।”<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने यह भी आह्वान किया कि इस अभियान को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखा जाए&comma; बल्कि इसे एक &OpenCurlyQuote;राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान अभियान’ के रूप में आगे बढ़ाया जाए। जब शिक्षक सम्मानित होगा&comma; तब ही शिक्षा सशक्त होगी।”<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्यपाल महोदय ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा&colon;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मुझे गर्व है कि बिहार से इस क्रांति की शुरुआत हो रही है। यह धरती चाणक्य&comma; आर्यभट्ट और विद्यापति की रही है — और अब यह नवभारत की शिक्षा क्रांति की अग्रदूत बनेगी। उनकी इन ऐतिहासिक&comma; भावनात्मक और नीति-सम्मत बातों ने सभा में उपस्थित सभी जिला अध्यक्षों&comma; शिक्षकों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को एक नई ऊर्जा और दृष्टिकोण प्रदान किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्यपाल महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि जब हम समाज की रीढ़ की बात करते हैं&comma; तो दो ही पेशे सबसे पवित्र माने गए हैं — शिक्षक और चिकित्सक एक शरीर को बचाता है तो दूसरा आत्मा को। और यही दो स्तंभ किसी भी सभ्यता को महान बनाते हैं। उन्होंने PSCWA और भारत सरकार के इस प्रयास को &OpenCurlyDoubleQuote;नई शिक्षा नीति 2020 के मूल उद्देश्य – समावेशी&comma; मूल्य-आधारित और कौशल-समर्थ शिक्षा” की दिशा में एक सशक्त पहल बताया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद का संबोधन&colon;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे PSACWA के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शमायल अहमद ने कहा की यह MOU कोई साधारण समझौता नहीं&comma; बल्कि प्राइवेट स्कूल सिस्टम को आत्मनिर्भर और शिक्षक को सशक्त बनाने की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम देशभर के निजी स्कूलों में कार्यरत नर्सरी शिक्षकों को ऐसा प्रशिक्षण देंगे&comma; जिससे वे न केवल बेहतर शिक्षक बनें&comma; बल्कि समाज को दिशा देने वाले मार्गदर्शक बनें। उन्होंने यह भी बताया कि अगले 6 महीनों में देश के सभी राज्यों और जिलों में चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। जिला अध्यक्षों को पहले ही निर्देशित किया गया है कि वे प्रत्येक जिले से अधिकतम पाँच योग्य प्रतिनिधियों को इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण अभियान में भेजें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के अंत में PSACWA बिहार इकाई के अध्यक्ष ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और बिहार में इस योजना को सबसे सफल राज्य बनाने का संकल्प लिया।<br &sol;>इस कार्यक्रम का मंच संचालन एसोसिएशन की राष्ट्रीय प्रधान कार्यालय सचिव फौजिया खान ने सुचारू रूप से किया। इस मौके पर संजीव चौरसिया डॉ अब्दुल अहमद हई&comma; फादर पीटर&comma; डॉ एस पी वर्मा&comma; फरहत हुसैन&comma; प्रो एस पी शाही&comma; डॉ श्याम नारायण कुंअर&comma; डॉ देवानंद झा&comma; श्री तमाल मुखर्जी&comma; श्री अनिल कुमार समेत 400 से अधिक लोग मौजूद थे।<&sol;p>&NewLine;

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