पारिवारिक आहार विविधता कार्यक्रम की सफलता को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;strong> गर्भवती महिला व छोटे उम्र के बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर जीविका द्वारा पारिवारिक आहार विविधता अभियान का संचालन किया जा रहा है। अभियान की सफलता को लेकर जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन एसबीआई आरसीटी भवन में किया गया। उप विकास आयुक्त मनोज कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में अभियान की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गयी। साथ ही इसके सफल क्रियान्वयन को लेकर जरूरी रणनीति पर विचार किया गया। कार्यक्रम में डीपीएम जीविका अनुराधा चंद्रा&comma; जिला उद्योग महाप्रबंधक&comma; जीविका के स्वास्थ्य व पोषण समन्वय अमित सागर&comma; पीसीआई के विवेक कुमार सहित जीविका के सभी प्रखंड परियोजना प्रबंधक&comma; प्रखंड स्तरीय कर्मी व स्वास्थ्य कैडर के सदस्य शामिल थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गर्भावस्था से बच्चे के जीवन का प्रथम दो वर्ष बेहद महत्वपूर्ण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीडीसी मनोज कुमार ने कहा कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य व सेहतमंद जिंदगी के लिये गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के प्रथम दो वर्ष का समय खासा महत्वपूर्ण है। इस दौरान हम स्वास्थ्य व पोषण का समुचित ध्यान रखकर बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि गर्भधारण के बाद से ही उचित पोषाहार का महत्व काफी बढ़ जाता है। भोजन में सभी जरूरी पोषक तत्वों की मौजूदगी मां व बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बेहतर पोषण के लिये आहार विविधता जरूरी &colon;<&sol;strong><br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीपीएम जीविका अनुराधा चंद्रा ने पारिवारिक आहार विविधता कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 6 से 23 माह के बच्चों के लिये उपलब्ध आहार को सात श्रेणियों में विभक्त गया है। वहीं गर्भवती व धात्री महिलाओं को दस आहार समूह में बांटा गया है। इसमें 6 से 23 माह के बच्चों के लिये उपलब्ध सात आहार समूह में कम से कम चार आहार समूह का नियमित सेवन जरूरी है। इसमें अनाज व कंद मूल&comma; दाल व फलियां&comma; मांस व मछली&comma; अंडा&comma; दूध व दूध से बनी चीजें&comma; हरी पत्तेदार सब्जियां&comma; फलों का समूह शामिल है। उसी तरह गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिये अनाज&comma; बादाम व बीज&comma; हरी सब्जियां&comma; मांस-मछली&comma; फल&comma; पीले व लाल रंग के फल&comma; दाल व फलियां&comma; पत्तेदार सब्जी&comma; दूध व संबंधित उत्पाद के आधार पर आहार का वर्गीकरण किया गया है। इसमें नियमित रूप से पांच समूह का आहार सेवन जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>समूह की महिलाओं को बेहतर पोषण के प्रति जागरूक करना उद्देश्य &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला में जानकारी देते हुए जीविका के जिला स्वास्थ्य व पोषण समन्वय अमित सागर ने कहा कि पारिवारिक आहार विविधता कार्यक्रम का उद्देश्य जीविका समूह की महिलाओं को आहार विविधता के महत्व से अवगत कराया जाना है। इसके तहत आगामी 07 अप्रैल को प्रखंड स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जायेगी। हाउस टू हाउस सर्वे करते हुए क्षेत्र में गर्भवती व धात्री महिलाओं के साथ दो साल से कम उम्र के बच्चों को सूचीबद्ध किया जायेगा। सर्वेक्षण कार्य की सफलता के लिये प्रखंड स्तर पर एमआरपी व पंचायत स्तर पर सीएनआरपी जिम्मेदार होंगे। ग्राम संगठन स्तर आगामी 08 अप्रैल को सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन प्रस्तावित है। वहीं 09 अप्रैल को व्यापक पैमाने में सहजन पौध रोपण करते हुए 10 से 20 अप्रैल के बीच में समूह की महिलाओं के बीच आहार प्रदर्शनी&comma; 24 अप्रैल को आहार विविधता विषय पर आधारित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किये जाने की जानकारी उन्होंने दी।<&sol;p>&NewLine;

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