स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला स्तरीय अनीमिया मुक्त भारत एवं सी-मैम कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar; न्यूज़ क्राइम 24<&sol;strong>&rpar; जिले में अनीमिया मुक्त भारत &lpar;AMB&rpar;&comma; मातृ अनीमिया प्रबंधन कार्यक्रम &lpar;Maternal Anemia Management Program&rpar; तथा बाल संवर्धन कार्यक्रम &lpar;सी-मैम&rpar; के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गुरुवार को होटल प्रयोज्य में एक दिवसीय जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ&period; प्रमोद कुमार कनौजिया ने की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग एवं समेकित बाल विकास सेवा &lpar;आईसीडीएस&rpar; के अधिकारियों ने भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बैठक में योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन एवं लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। कार्यशाला में यूनिसेफ बिहार के पोषण पदाधिकारी डॉ&period; संदीप घोष&comma; एम्स पटना के डॉ&period; शिवाजी देव बर्मन&comma; यूनिसेफ के सी-मैम राज्य सलाहकार स्टेला ग्रेस&comma; स्कूल न्यूट्रिशन राज्य सलाहकार प्रकाश कुमार&comma; जिला पोषण सलाहकार निधि भारती एवं शुभम गुप्ता सहित सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी&comma; बाल विकास परियोजना पदाधिकारी&comma; प्रखंड समन्वयक तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बच्चों में एनीमिया एवं कुपोषण की रोकथाम पर विशेष जोर &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बैठक के दौरान 6 से 59 माह आयु वर्ग के बच्चों में आयरन-फोलिक एसिड &lpar;आईएफए&rpar; अनुपूरण की स्थिति&comma; कुपोषण की पहचान एवं प्रबंधन&comma; सामुदायिक जागरूकता तथा विभागीय समन्वय को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को डाटा प्रविष्टि की गुणवत्ता&comma; समयबद्धता और सत्यापन प्रक्रिया में सुधार लाने तथा प्रमुख सूचकांकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>मातृ अनीमिया प्रबंधन को प्रभावी बनाने के निर्देश &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बैठक में गर्भवती महिलाओं में अनीमिया के लक्षणों की पहचान एवं समय पर उपचार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि त्वचा&comma; चेहरे&comma; जीभ एवं आंखों की लाली में कमी&comma; अत्यधिक थकान&comma; सांस फूलना&comma; चक्कर आना&comma; भूख न लगना तथा चेहरे एवं पैरों में सूजन अनीमिया के प्रमुख लक्षण हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेषज्ञों ने बताया कि शरीर में पर्याप्त आयरन होने से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इसके लिए आयरन युक्त भोजन के साथ विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। विभिन्न आयु वर्गों के लिए निर्धारित आईएफए अनुपूरण कार्यक्रम की जानकारी भी साझा की गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>डिजिटल हेमोग्लोबिनोमीटर से होगी अनीमिया की जांच &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं में अनीमिया की जांच डिजिटल हेमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। बताया गया कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों&comma; सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों&comma; रेफरल अस्पतालों एवं अनुमंडलीय अस्पतालों में गंभीर अनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं का उपचार आयरन सुक्रोज के माध्यम से किया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाए तथा उन्हें आयरन सुक्रोज की पूर्ण खुराक उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही&comma; प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान &lpar;पीएमएसएमए&rpar; के अंतर्गत चिन्हित सभी एनीमिक गर्भवती महिलाओं का नियमित फॉलोअप कर पेरेंट्रल आयरन थेरेपी से उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बाल संवर्धन के लिए समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन के दस चरणों पर प्रशिक्षण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला में विशेषज्ञों ने समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन &lpar;सी-मैम&rpar; के दस प्रमुख चरणों की विस्तृत जानकारी दी। इसमें वृद्धि निगरानी&comma; दोनों पैरों में सूजन की जांच&comma; भूख परीक्षण&comma; चिकित्सीय मूल्यांकन&comma; देखभाल स्तर का निर्धारण&comma; पोषण एवं चिकित्सीय प्रबंधन&comma; स्वच्छता एवं पोषण संबंधी परामर्श&comma; नियमित निगरानी एवं गृह भ्रमण&comma; कार्यक्रम से डिस्चार्ज तथा डिस्चार्ज के बाद मासिक फॉलोअप शामिल हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेषज्ञों ने आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बच्चों की वृद्धि निगरानी&comma; सामुदायिक जागरूकता&comma; कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र &lpar;एनआरसी&rpar; तक रेफर करने तथा परिवारों को उचित पोषण एवं स्वच्छता संबंधी परामर्श प्रदान करने की आवश्यकता बताई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बैठक में गंभीर रूप से कम वजन एवं गंभीर रूप से दुबले बच्चों के भूख परीक्षण&comma; नियमित स्वास्थ्य जांच तथा उनकी पोषण स्थिति के आकलन एवं प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा चिन्हित गंभीर रूप से दुबले बच्चों की सूची के अनुसार प्रत्येक बच्चे का वजन एवं ऊंचाई का सत्यापन कर नियमित रिकॉर्ड संधारित किया जाए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समीक्षा बैठक में अनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम एवं बाल संवर्धन कार्यक्रम से संबंधित आवश्यक अनुपूरकों की समय पर उपलब्धता&comma; इंडेंट एवं कवरेज सुनिश्चित करने के साथ-साथ वीएचएसएनडी सत्रों पर सभी आवश्यक सेवाओं एवं सामग्रियों की उपलब्धता पर भी विस्तृत चर्चा की गई।<&sol;p>&NewLine;

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