प्रसव कक्ष के प्रभारियों के साथ जिलास्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;strong> स्वास्थ्य विभाग अपनी बेहतरी को लेकर प्रतिदिन विभागीय स्तर पर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति बनाने को लेकर जुटे हुए रहता है। इसी क्रम में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय सह अस्पताल परिसर स्थित जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी के सभागार में स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के द्वारा जिला स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें जीएमसीएच स्थित प्रसव कक्ष की प्रभारी सहित जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों की प्रसव कक्ष प्रभारी मौजूद रही। जुलाई महीने में प्रसव कक्ष में गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं से संबंधित समीक्षात्मक बैठक कर पहले से बेहतर बनाने को लेकर विचार किया गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ एसके वर्मा&comma; डीआईओ डॉ विनय मोहन&comma; डीसीक्यूए डॉ अनिल कुमार शर्मा&comma; केयर इंडिया के डीटीओ &lpar;एफ&rpar; डॉ देवब्रत महापात्रा&comma; डीटीओ &lpar;ऑन&rpar; अमित कुमार&comma; डीपीएचओ सोमेन अधिकारी&comma; एनएमएस मधुबाला&comma; सनत गुहा&comma; अवधेश कुमार&comma; राजीव कुमार एवं सीफार के धर्मेंद्र रस्तोगी सहित कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अपने दायित्वों को निष्ठा के साथ करना होगा निर्वहन&colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ एसके वर्मा ने उपस्थित सभी प्रसव कक्ष की प्रभारी जीएनएम एवं एएनएम से कहा कि आप सभी अपने-अपने प्रसव कक्ष को सुसज्जित एवं सुव्यवस्थित तरीक़े से रखते हुए गर्भवती महिलाओं को सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। ताकि भविष्य में भी वह अपने या अन्य गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ही प्रसव कराना सुनिश्चित करते हुए जच्चा व बच्चा का अनिवार्य रूप से ख़्याल रखने की जरूरत है। क्योंकि जब तक जच्चा व बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ नहीं होंगे तब तक प्रसव कक्ष की प्रभारी जीएनएम एवं एएनएम का दायित्व पूर्ण नहीं होगा। जन्म के समय अगर कोई बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य नहीं है तो उसको किस तरह के पौष्टिक आहार दिया जाना चाहिए ताकि जच्चा व बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य एवं सुरक्षित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गर्भवती महिलाओं या अभिभावकों के साथ करें सम्मानजनक व्यवहार&colon; केयर इंडिया<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>केयर इंडिया के डीटीओ &lpar;एफ&rpar; डॉ देवब्रत महापात्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्थानीय नागरिकों को गरिमामय मातृत्व देखभाल मुहैया कराए जाने को लेकर समय-समय पर अधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है&comma; ताकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत कर्मियों के प्रति लोगों में भरोसा उत्पन्न हो और स्वास्थ्य केंद्र में अधिक से अधिक प्रसव या मरीजों का आना हो सके। स्वास्थ्य कर्मियों को इसके लिए अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। गर्भवती महिलाओं को सम्मानजनक मातृत्व देखभाल के लिए सभी जीएनएम एवं एएनएम को आवश्यक सुझाव दिया गया। जिसे राष्ट्रीय नीतियों&comma; सुविधा केंद्रों में बदलावों और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता के माध्यम से निपटा जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से नही होती हैं एनीमिया की कमी&colon; डीटीओ &lpar;ऑन&rpar;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>केयर इंडिया के डीटीओ &lpar;ऑन&rpar; अमित कुमार ने कहा कि जच्चा व बच्चा को स्वास्थ्य रखने के लिए सबसे पहले गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे ज़्यादा विटामिन खाने की आवश्यकता पड़ती है। क्योंकि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की कमी होती है जिस कारण जन्म लेने वाला बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य नहीं हो पाता है। इसकी पूर्ति के लिए हरी पत्तेदार सब्जियों का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही विभिन्न तरह के फलों का प्रयोग करते रहना चाहिए। शिशुओं की हड्डी एवं दांतों की वृद्धि के लिए अनिवार्य रूप से कैल्सियम खाने की हिदायत दी जाती है। कैल्सियम की पूर्ति के लिए दूध का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। हालांकि रागी और बाजरे में भी कैल्सियम की उपलब्धता ज्यादा होती है। गर्भावस्था के दौरान प्रोटीनयुक्त आहार अनिवार्य से लेना पड़ता है। यदि संभव हो तो गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में दूध&comma; अंडा&comma; मछली&comma; पॉल्ट्री उत्पाद एवं मांस का सेवन करना चाहिए। यदि वह शाकाहारी हो तो उसे विभिन्न अनाजों तथा दालों का प्रयोग करना ज़्यादा लाभदायक होता है।<&sol;p>&NewLine;

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