राज्य के पशु अस्पतालों में जल्द शुरू होगी डायग्नोस्टिक सेंटर और एक्स-रे की सुविधा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> बिहार पशु विज्ञान विवि में फीड इंडस्ट्री–अकादेमिया इंटरफेस मीट&comma; गुणवत्ता और मानकीकरण पर मंथन&period; फुलवारी शरीफ स्थित बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अंगीभूत बिहार पशुचिकित्सा महाविद्यालय के पशु पोषण विभाग द्वारा गुरुवार को फीड इंडस्ट्री–अकादेमिया इंटरफेस मीट का आयोजन किया गया&period; कार्यक्रम में फीड की गुणवत्ता&comma; मानकीकरण और पशुपालकों को बेहतर एवं किफायती पशु आहार उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के डेयरी&comma; मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के निदेशक&comma; पशुपालन उज्ज्वल कुमार सिंह ने कहा कि फीड इंडस्ट्री&comma; सरकार और वैज्ञानिकों का एक मंच पर आना सराहनीय पहल है&period; यह राज्य और पशुपालकों के हित में मील का पत्थर साबित होगी&period; <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण पशु आहार से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होता है और दूध&comma; मांस व अंडा उत्पादन में वृद्धि होती है&period; उन्होंने फीड निर्माण से लेकर वितरण तक गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया&period; उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों में जल्द ही पशुओं के लिए आधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर और एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ&period; इंद्रजीत सिंह ने कहा कि फीड इंडस्ट्री के माध्यम से ही पशुपालकों और किसानों तक वास्तविक लाभ पहुंच सकता है&period; उन्होंने बताया कि पशुपालन में लगभग 70 प्रतिशत खर्च फीड पर होता है&comma; इसलिए उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाला फीड उपलब्ध कराना आवश्यक है&period; उन्होंने कहा कि बिहार मक्का उत्पादन में अग्रणी है और स्थानीय स्तर पर मक्का उपयोग से फीड की लागत कम की जा सकती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>गुरु अंगद देव पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय&comma; लुधियाना के अतिरिक्त निदेशक डॉ&period; परमिंदर सिंह ने पशुधन एवं कुक्कुट आहार की वर्तमान स्थिति पर व्याख्यान दिया&period; उन्होंने फीड की उपलब्धता&comma; गुणवत्ता और लागत से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला&period; डीन&comma; स्नातकोत्तर शिक्षा प्रो&period; पंकज कुमार सिंह ने कहा कि मक्का&comma; सोयाबीन&comma; सरसों खली&comma; डीडीजीएस और राइस पॉलिश जैसे कच्चे माल की वैज्ञानिक जांच आवश्यक है&period; उन्होंने फीड में पोषक तत्वों के संतुलन और अफ्लाटॉक्सिन नियंत्रण पर जोर दिया&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पशु पोषण विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ&period; धर्मेंद्र कुमार ने विभागीय गतिविधियों और बिहार के लिए विकसित मिनरल मिक्सचर &OpenCurlyQuote;बासुमिन’ की जानकारी दी&period; स्वागत भाषण सह-प्राध्यापक डॉ&period; कौशलेंद्र कुमार ने दिया। बैठक में कई फीड उद्योगों ने विश्वविद्यालय के छात्रों को अपने प्लांट में प्रशिक्षण देने पर सहमति जताई&period; इस मीट में बिहार&comma; झारखंड&comma; छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से 28 से अधिक फीड कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में बिहार पशुचिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ&period; जे&period;के&period; प्रसाद&comma; संजय गांधी गव्य प्रौद्योगिकी संस्थान के डीन डॉ&period; उमेश सिंह&comma; निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ&period; एन&period;एस&period; दहिया&comma; निदेशक शोध डॉ&period; एन&period;के&period; सिंह&comma; विभागाध्यक्ष प्रो&period; डॉ&period; संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक&comma; शिक्षक&comma; उद्योग प्रतिनिधि और छात्र उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;

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