मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप एवं देवी भागवत की महिमा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong>। श्री श्री 108 सार्वजनिक दुर्गा मंदिर परिसर में माता दुर्गा की प्रतिमा के आठवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठे दिन गुरुवार को श्रद्धा&comma; भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं&comma; विशेषकर महिलाओं की उपस्थिति से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। कथा वाचिका राजयोगिनी बीके प्रभा दीदी ने मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप&comma; मां कात्यायनी की महिमा तथा श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के महत्व का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म&comma; सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि 18 महापुराणों में देवी भागवत पुराण को सर्वोत्तम स्थान प्राप्त है। इसका श्रद्धा और भक्ति भाव से श्रवण करने मात्र से मनुष्य के करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। देवी की कृपा से घर में सुख-शांति&comma; समृद्धि और माता लक्ष्मी का स्थायी वास होता है तथा जीवन के अंत में देवी लोक की प्राप्ति होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कथा के दौरान उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए कहा कि सृष्टि के प्रारंभ में कुछ भी नहीं था&comma; केवल मां आदिशक्ति विद्यमान थीं। उन्हीं की इच्छा से ब्रह्मा&comma; विष्णु और महेश का प्राकट्य हुआ। उन्होंने बताया कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे&comma; तब उनकी नाभि से ब्रह्मा जी प्रकट हुए। उसी समय मधु और कैटभ नामक दो असुर उत्पन्न हुए और ब्रह्मा जी का वध करने के लिए दौड़े। तब ब्रह्मा जी ने आदिशक्ति भगवती की स्तुति की। मां भगवती की कृपा से भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागे और लगभग पाँच हजार वर्षों तक चले भीषण युद्ध के बाद मधु-कैटभ का संहार कर धर्म की रक्षा की। राजयोगिनी प्रभा दीदी ने कहा कि जब-जब संसार में अधर्म&comma; अत्याचार और अन्याय बढ़ता है&comma; तब-तब मां भगवती विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होकर दुष्ट शक्तियों का विनाश करती हैं। मां कात्यायनी का जीवन संदेश देता है कि अंततः सत्य&comma; धर्म और न्याय की ही विजय होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में संस्कार&comma; संयम&comma; सेवा&comma; करुणा और ईश्वर भक्ति को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन बीके अमन भाई ने किया तथा आयोजन समिति ने कथा की सभी व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कथा के समापन पर भगवान शिव एवं माता पार्वती की दिव्य एवं मनमोहक चेतन्य झांकी प्रस्तुत की गई&comma; जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। झांकी के दौरान पूरा पंडाल &&num;8220&semi;हर-हर महादेव&&num;8221&semi; और &&num;8220&semi;जय माता दी&&num;8221&semi; के जयघोष से गूंज उठा तथा भक्तों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर बीके अमन भाई&comma; भाई देवनसी जी&comma; बहन ज्योति कुमारी&comma; बहन विभा जी&comma; अररिया जिला परिषद की उपाध्यक्ष चांदनी देवी तथा समाजसेवी श्रवण कुमार दास सहित समिति सदस्य श्यामदेव यादव&comma;मनोज यादव&comma;महेश प्रसाद गुप्ता&comma; रंजीत ठाकुर&comma;भानु ठाकुर&comma;पंडित मनोज झा&comma;केवल बदलिया के अलावे अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अतिथियों ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों&comma; सद्भाव और सकारात्मक सोच को मजबूत करते हैं। उन्होंने कामना की कि राजयोगिनी बीके प्रभा दीदी समय-समय पर क्षेत्र में आकर लोगों को धर्म&comma; संस्कार और सदाचार के मार्ग पर प्रेरित करती रहें।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भक्ति&comma; आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा तथा श्रद्धालु कथा श्रवण कर मां भगवती की कृपा का अनुभव करते हुए भावविभोर नजर आए।<&sol;p>&NewLine;

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