हाईकोर्ट एवम विधि विभाग के आदेश के बाबजूद 15 वर्षो के बाद भी नही शुरू हुआ फारबिसगंज का सिविल कोर्ट

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> वर्ष 1990 -1991 में स्थापित फारबिसगंज अनुमंडल को आजतक लगभग 29 वर्षो के बाद भी सिविल कोर्ट का कार्यारंभ नही होने के कारण सरकार का सस्ता और सुलभ न्याय का परिकल्पना साकार होता नही नजर आ रहा है&comma; उल्लेखनीय है कि बिहार में 1990 -1991 में लगभग दो दर्जन से अधिक अनुमंडल और आधा दर्जन से अधिक जिला का सिर्जन सरकार के द्वारा किया गया बिहार में वर्तमान में लगभग 105 अनुमंडल कार्यरत है&comma; फारबिसगंज अनुमंडल को न्यायिक अनुमंडल का दर्जा माननीय उच्च न्यायालय पटना एवम विधि विभाग बिहार सरकार के द्वारा वर्ष 2018 में ही दिया गया है। उल्लेखनीय है कि फारबिसगंज अनुमंडल को न्यायिक अनुमंडल का दर्जा दिए जाने एवम कोर्ट के स्थापना एवम कार्यारंभ के लिए माननीय उच्च न्यायालय पटना में एक जनहित याचिका पीआईएल मुकदमा संख्या सी डब्लू जे सी 11351&sol;2006 फाइल किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>याचिकर्ताओ की और से उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता महेंद्र प्रसाद गुप्ता के द्वारा लगभग 18 तिथियों में माननीय न्यायलय के समक्ष रखा गया माननीय न्यायलय के द्वारा वर्ष 2008 में मुकदमे में आदेश पारित किया जिसके उपरांत माननीय उच्च न्यायालय के सहमति से बिहार सरकार के द्वारा बिहार सरकार के विधि विभाग के तत्कालीन सचिव ज्ञानचंद्र के द्वारा विभागीय पत्र निर्गत करके फारबिसगंज में सिविल कोर्ट को स्थापना एवम कार्यारंभ के लिए वरीयता सूची के क्रमांक 5 पर चिंहित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फारबिसगंज अनुमंडल न्यायलय के अधिवक्ताओं के द्वारा वर्षो से लगातार शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन दर आंदोलन चलाते न्यायिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष किया जाता रहा है इस संबंध में कई बार संबंधित विभाग में आवेदन भी भेजा गया है लेकिन नतीजा ढाक के पात रहा है। फारबिसगंज अनुमंडल बिहार का पहला अनुमंडल है जिसके पास 28 एकड़ की बिहार सरकार की भूमि है। लेकिन फिर भी सरकार के द्वारा कोर्ट के कार्यारंभ के प्रति उदाशीनता रवैया अपनाया जा रहा है। सिविल कोर्ट के कार्यारंभ के लिए सारे संसाधन भी स्थापित किया गया लेकिन कोर्ट के कार्यरंभ और कोर्ट की कार्यवाही संचालन के लिए यहां के अधिवक्ताओं को भी आम मुवक्किल की तरह ही तारीख पर तारीख ही मिलता आ रहा है लेकिन कोर्ट के कार्यारंभ की कोई निश्चित तिथि किसी विधि विभाग या हाईकोर्ट के द्वारा घोषित नही की जा सकी है और ना ही कोर्ट के शुभारंभ के बारे में ही कुछ बतलाया जा रहा है। इसके पूर्व में पटना के माननीय न्यायधीश अमरेंद्र प्रताप शाही के द्वारा फारबिसगंज अनुमंडल कार्यालय पहुंच कर निर्माणाधीन कोर्ट भवनों का स्थल निरक्षण किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अररिया न्याय मंडल के जिला एवम सत्र न्यायधीश पीयूष कुमार दीक्षित के द्वारा अररिया जिला प्रशाशन में द्वारा उपलब्ध करवाए गए पुराने कोर्ट भवन की मरम्मती करवा कर तत्काल मुंसफ और सब जज कोर्ट के कार्यारंभ के लगातार प्रयास किया गया तथा उपलब्ध करवाए गए भवन पर लगभग 50 लाख से अधिक राशि का खर्च किया गया इसके साथ ही कोर्ट के कार्यारंभ के लिए सारे संसाधन भी स्थापित किया गया लेकिन आज तक तारीख पर तारीख दिया जाता रहा लेकिन कोर्ट का कार्यरांभ नही हो पाया है। अनुमंडल क्षेत्र के गरीब और बेबस जनताओं को भी न्याय पाने के लिए आजादी के 75 वर्ष बाद भी 80 से 100 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ रहा है&comma; सरकार के द्वारा सस्ता और सुलभ न्याय का परिकल्पना भी अब मिथ्या साबित हो रही है। इस मामले में अनुमंडल और जिला के जनप्रतिनिधि भी अपनी कोई रुचि या पहल नही कर रहे है।<&sol;p>&NewLine;

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