भ्रष्टाचार अधिनियम में सख्त बदलाव की मांग, रिश्वत देने वाले और लेने वाले में अंतर का सुझाव

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित<&sol;strong>। भारतीय लोकायुक्त पार्टी &lpar;बी एल पी&rpar; ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर 1988-2018 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता जताई है&period; पत्र में कहा गया है कि 2018 में अधिनियम में बदलाव के कारण रिश्वत देने वाले और लेने वाले दोनों अपराधी माने जाने लगे हैं&comma; जिससे आम जनता सच बोलने में बाधित हो रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भारतीय लोकायुक्त पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रेमलोक मिशन स्कूल के निदेशक&comma; प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पर्यावरणविद् गुरुदेव श्री प्रेम ने बताया कि &OpenCurlyDoubleQuote;यदि रिश्वत लेने वालों को अपराधी मानते हुए सख्त दंड का प्रावधान किया जाए तो देश में भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पत्र में सिंगापुर के उदाहरण का हवाला देते हुए सुझाव दिया गया है कि रिश्वत लेने वाले को अपराधी मानते हुए चीन की तरह आजीवन कारावास या मृत्यु दंड जैसी सख्त सज़ा लागू की जाए&period; बी एल पी ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी की है।<&sol;p>&NewLine;

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