दानापुर में गौस-ए-आज़म के तबर्रुकात की ज़ियारत व जलसा-ए-नबी पाक में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>दानापुर&comma; अजीत।<&sol;strong> दानापुर कैंट के शाह टोली स्थित ऐतिहासिक खानकाह क़ादरीया चिश्तिया नेज़ामिया में शुक्रवार और शनिवार को गौस-ए-आज़म हज़रत सैयद अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह के पवित्र तबर्रुकात की ज़ियारत और जलसा-ए-नबी पाक का आयोजन बड़ी अकीदत और रूहानियत के माहौल में संपन्न हुआ&period; इस पवित्र कार्यक्रम की अगुवाई सज्जादा नशीन हज़रत सैयद शाह अहमद सुल्तान क़ादरी चिश्ती नेज़ामी अशरफ़ी ने की&period; यह आयोजन उनके परिवार की सदियों पुरानी रूहानी परंपरा के तहत हर साल की तरह इस वर्ष भी आयोजित हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>खानकाह परिसर में गौस-ए-आज़म के पवित्र तबर्रुकात — मुबारक सैंडल &lpar;जूती शरीफ़&rpar;&comma; ख़िरका-ए-शरीफ़&comma; कमरबंद-ए-मुबारक&comma; कमरबंद-ए-वहदत और दरगाह शरीफ़ की पवित्र ईंट &lpar;ईंट-ए-मुकद्दस&rpar; की नुमाइश कराई गई&period; इन पवित्र तबर्रुकात की ज़ियारत के लिए पटना और आसपास के इलाकों से हजारों अकीदतमंद पहुंचे&period; महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग समय पर ज़ियारत की व्यवस्था की गई थी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का आगाज़ शुक्रवार को ईशा की नमाज़ के बाद मोमबत्तियाँ जलाकर&comma; क़ुल&comma; फातिहा और क़ादरी लंगर के साथ हुआ&period; शनिवार को फज्र की नमाज़ के बाद कुरानख्वानी और दुआएं की गईं&period; ज़ुहर की नमाज़ के बाद महिलाओं को और अस्र के बाद पुरुषों को तबर्रुकात की ज़ियारत कराई गई&period; मगरिब के बाद जलसा-ए-नबी पाक का आयोजन हुआ&comma; जिसमें नात&comma; दुरूद शरीफ़ और इस्लामी तकरीरें पेश की गईं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सज्जादा नशीन हज़रत सैयद शाह अहमद सुल्तान क़ादरी चिश्ती नेज़ामी अशरफ़ी ने इस मौके पर मुल्क में अमन&comma; भाईचारा और खुशहाली की दुआ मांगी&period; उन्होंने कहा कि &OpenCurlyDoubleQuote;गौस-ए-आज़म रहमतुल्लाह अलैह की तालीमात इंसानियत&comma; मोहब्बत और ख़िदमत का पैग़ाम देती हैं&period; खानकाहों का मकसद दिलों में एकता और ईमान को मज़बूत करना है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पूरे शाह टोली और खानकाह परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया था&period; रातभर नात और दुआओं की महफ़िलें जारी रहीं&period; क़ादरी लंगर में सैकड़ों अकीदतमंदों ने बैठकर खाना खाया&period; खानकाह प्रबंधन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दानापुर की यह खानकाह लगभग 700 साल पुरानी है और सूफ़ी सिलसिला-ए-क़ादरिया-चिश्तिया-नेज़ामिया की एक अहम दरगाह मानी जाती है&period; यहाँ हर साल तबर्रुकात की ज़ियारत और जलसा-ए-नबी पाक का आयोजन हजारों अकीदतमंदों को रूहानी सुकून देता है।<&sol;p>&NewLine;

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