ज्ञान परम्परा में सूक्ष्म गहन चिंतन के प्रति समर्पण व प्रतिबद्धता ही स्नातकोत्तर शिक्षा की मांग : प्रो माला सिंह

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> शुक्रवार को समाजविज्ञान संकाय&comma; पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पटना के स्नातकोत्तर विभाग में 2024-2026 सत्र में नामांकित प्रथम सेमेस्टर के इंडक्शन मीट का आयोजन में नए छात्रों को स्नातकोत्तर विभागों के वातावरण से परिचित कराने और उन्हें एक समृद्ध शैक्षणिक अनुभव प्रदान करने के लिए किया गया है। नए छात्रों ने इस आयोजन में बड़ी उत्सुकता से भाग लिया और विभाग के वातावरण को समझने का प्रयास किया। कार्यक्रम का अयोजन समाज विज्ञान संकाय द्वारा किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष सह सामाजिक विज्ञान की संकायाध्यक्ष प्रो&period; माला सिंह ने कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय गुरु शिष्य परंपरा और वर्तमान परिपेक्ष्य पर उसकी प्रासंगिकता विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने पाठयक्रम एवं अकादमिक अनुशासन के साथ साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अनुशंशाओ से अवगत करवाते हुए नई शिक्षा नीति आरा वैश्विक संदर्भ के साथ भारती परिवेश में ज्ञान एवं शिक्षा की अवधारणा के साथ बिहार की भूमिका तथा वर्तमान समय में इसके भावनात्मक जुड़ाव के साथ भौतिक परिवेश के अनुरूप संशोधित होते तथ्यों की प्रासांगिकता को दर्शाया। नव नामांकित छात्र छात्राओं को सुखद भविष्य की शुभकामना दी। स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो&period; प्रीति कश्यप&comma; सभी छत्र छात्राओं को अपने उद्बोधन में वर्तमान उच्च शिक्षा के प्रति समर्पण शोध परक दृष्टि से स्नातकोत्तर स्तर पर ज्ञान के विकास को अग्रसर करने के लिए प्रेरित किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्नातकोत्तर प्राचीन इतिहास एवं एशीयाई अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो कनक भूषण मिश्रा ने सभी शिक्षकों एवं छात्र छात्राओं का स्वागत करते हुए अयोजन की प्रासंगिकता को दर्शाया साथ ही वर्तमान भौतिक परिवेश गुरु शिष्य के सम्बन्ध में भावनात्मक जुड़ाव&comma; ज्ञान और चरित्र निर्माण में शिक्षक और छात्र छात्राओं की भुमिका से सभी को अवगत कराया। कार्यक्रम में डा प्रीति गुप्ता&comma; डा त्रिपति ने छात्र छात्राओं को पाठयक्रम से अवगत कराया। स्नातकोत्तर इतिहास विभाग से प्रो राजीव रंजन ने विश्वविद्यालय एवं विभागीय गतिविधि के संदर्भ में छात्र छात्राओं के दयित्व और कर्तव्यों की बात कही। अर्थशास्त्र विभाग के अनुप कुमार झा ने वर्तमान समय में शिक्षा के स्वरूप की सुक्ष्म व्याख्या और वर्ग तथा शिक्षक के महत्व को रेखांकित करते हुए वर्तमान परिवेश में तकनिक पर निर्भरतत के प्रति उचित दृष्टि और गुण तथा कमजोरी पर बल दिय। स्नातकोत्तर इतिहास विभाग से अविनाश कुमार झा ने कार्यक्रम का संचालन किया। बड़ी संख्या में छत्र छात्राओं तथा शोधार्थियों की उपस्थिति रही।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

दो दिवसीय माटी का दंगल कुश्ती प्रतियोगिता का उपमुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन

शहीदों के स्मृति में एक दीप शहीदों के नाम कार्यक्रम कर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि विजय कुमार सिन्हा

मैट्रिक परीक्षा को लेकर प्रशासन सख्त : जूता-मोजा पहनकर आने पर पाबंदी, आधे घंटे पहले पहुंचना अनिवार्य