लातेहार के बालूमाथ में दारुल कजा की शुरुआत, न्याय व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ स्थित जामिया मस्जिद में इमारत ए शरिया के तहत दारुल कजा &lpar;धार्मिक न्याय व्यवस्था&rpar; की शुरुआत की गई&period; इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमीर शरिया मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने कहा कि आस्था के बाद समाज में न्याय स्थापित करना सबसे जरूरी जिम्मेदारी है&period; उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को उसका अधिकार मिलना चाहिए और समाज में अन्याय की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस मौके पर मौलाना मुफ्ती मुहम्मद उमर फारूक कासमी को काजी शरीयत के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई&period; उनसे अपेक्षा की गई कि वे लोगों के आपसी मामलों का समाधान न्यायपूर्ण तरीके से करेंगे। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि दारुल कजा के माध्यम से आपसी विवादों का समाधान आसान और सुलभ तरीके से किया जा सकता है&period; इससे लोगों को समय पर न्याय मिलेगा और सामाजिक विवाद कम होंगे। इमारत ए शरिया से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों ने भी अपने विचार रखे और कहा कि समाज में ईमानदारी&comma; सच्चाई और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है&period; साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे आपसी मामलों को बातचीत और समझदारी से सुलझाएं। कार्यक्रम में कई सामाजिक और धार्मिक लोग मौजूद रहे&period; अंत में देश की शांति&comma; समाज की बेहतरी और इस नई व्यवस्था की सफलता के लिए प्रार्थना की गई।<&sol;p>&NewLine;

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