शारदीय नवरात्र की शुरुआत होते ही मंदिरों में उमड़ी भीड़

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना&comma; न्यूज क्राइम 24।<&sol;mark><&sol;strong> अजीत शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो गई है। ऐसे में नवरात्र की शुरुआत होने के बाद सभी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है। नवरात्रि को लेकर पूरा इलाका भक्ति मय है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राजधानी से सटे बिहटा प्रखंड के ऐतिहासिक मां वनदेवी महाधाम में नवरात्र की शुरुआत होते ही सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं की कतार लगी हुई है। पटना से लगभग 35 किमी दूर बिहटा नगर के अमहारा के कंचनपुर में स्थित ऐतिहासिक वनदेवी मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। भक्तों में यह मान्यता है की इस मंदिर में आकर सच्चे मन से मां से मांगने वाले हर भक्त की मनोरथ जरूर पूरी होती है&comma;यूं तो इस मंदिर में हर रोज भक्तों की भीड़ लगती है। लेकिन हर साल नवरात्र में यहां आने वाले भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> बात इस मंदिर के इतिहास की करें तो लगभग 400 साल पहले मां विंध्यावासिनी के पिंड का अंश लाकर उनके भक्त और सिद्ध पुरुष विद्यानंद मिश्र ने इनकी स्थापना कराई थी। तब मिश्रीचक में काफी जंगल था। इसलिए इनका नाम वनदेवी रखा गया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ऐसे तो इस मंदिर को लेकर कई किवंदतियां हैं। लेकिन जो सबसे प्रचलित है। इसमें मां वनदेवी की स्थापना और अपने भक्त की लाज बचाने के लिए वनदेवी काकनखा माई बनना ज्यादा मशहूर है। बताया जाता है कि विद्यानंद वनदेवी मंदिर में ध्यान में लिन थे। सन्यासी ने अपने भेड़ों से कई सवाल कराकर उनके ध्यान तोड़ने की कोशिश करने लगा। इस पर विद्यानंद ने अपने आगे रखे कलश पर त्रिपुंड से स्पर्श किया। भेड़ों के सवाल के जवाब उस कलश से निकलने लगा। सन्यासी को इस पर क्रोध आ गया और उसने कलश पर प्रहार कर दिया।<&sol;p>&NewLine;

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