मक्का बर्बाद, खेत खाली हो गए, लेकिन किसानों को अब तक नहीं मिला मुआवजा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;strong> मार्च महीने में आए तेज आंधी-तूफान ने फारबिसगंज प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया था। अड़राहा&comma; परवाहा&comma; सैफगंज&comma; मिर्जापुर&comma; हरिपुर&comma; मुसहरी&comma; झिरूवा पछियारी और झिरूवा पुरवारी समेत दर्जनों पंचायतों में किसानों की मक्का फसल पूरी तरह तबाह हो गई थी। सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति मुआवजा देने की घोषणा के बाद किसानों ने ऑनलाइन आवेदन भी किया&comma; लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद अधिकांश किसानों को अब तक कोई राहत नहीं मिल सकी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्थिति यह है कि खेतों में गिरी मक्का की फसल अब पूरी तरह कट चुकी है। कई किसानों ने खराब हो चुकी फसल को ट्रैक्टर से जोत दिया&comma; जबकि कई किसानों ने उसे मवेशियों के चारे के रूप में इस्तेमाल कर लिया। किसानों का कहना है कि फसल बर्बाद होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन की ओर से जल्द सर्वे कर मुआवजा दिया जाएगा&comma; लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सह सीमांचल मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष प्रभात यादव ने जिला पदाधिकारी एवं जिला कृषि पदाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि सलाहकार और कृषि समन्वयक स्तर पर भारी लापरवाही बरती जा रही है&comma; जिसके कारण प्रभावित किसानों को समय पर राहत नहीं मिल पा रही है। प्रभात यादव ने कहा कि किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण गरीब किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द क्षति का सत्यापन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए&comma; ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। वहीं स्थानीय किसानों ने भी चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मुआवजा नहीं मिला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगें।<&sol;p>&NewLine;

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