वैशाली हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा धूमधाम से मनाई गई

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>हाजीपुर&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> शहर के मेदिनिमल स्थित टैगोर स्कूल के सभागार में वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह &OpenCurlyQuote;दिनकर’ की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं विद्यालय के निदेशक डॉ&period; शशि भूषण कुमार ने की।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अपने संबोधन में डॉ&period; शशि भूषण कुमार ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर बिहार की महान साहित्यिक धरोहर थे। उनकी रचनाओं ने हिंदी साहित्य को नई ऊंचाई प्रदान की और उनकी साहित्यिक प्रतिभा का प्रभाव देश-विदेश तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि दिनकर की रचनाओं में राष्ट्रप्रेम&comma; ओज&comma; विद्रोह और सामाजिक चेतना की प्रखर अभिव्यक्ति दिखाई देती है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने बताया कि रामधारी सिंह &OpenCurlyQuote;दिनकर’ का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में उनकी लेखनी ने राष्ट्रीय चेतना को स्वर दिया। स्वतंत्रता के बाद उन्हें &OpenCurlyQuote;राष्ट्रकवि’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वरिष्ठ साहित्यकार रविंद्र कुमार रतन ने कहा कि दिनकर की प्रमुख कृतियों में रश्मिरथी&comma; कुरुक्षेत्र&comma; उर्वशी&comma; रेणुका और हुंकार शामिल हैं। उनकी गद्य रचना संस्कृति के चार अध्याय के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने कहा कि दिनकर की साहित्यिक रचनाएं ओज&comma; आक्रोश&comma; विद्रोह और राष्ट्रप्रेम के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन की गहरी समझ को भी अभिव्यक्त करती हैं।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वहीं&comma; वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि शंभूनाथ मिश्रा ने कहा कि दिनकर की कविताओं में वीर रस और ओज के साथ कोमल श्रृंगारिक भावनाओं का भी अनूठा संगम देखने को मिलता है। उनकी काव्य-कृति उर्वशी इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने बताया कि दिनकर संसदीय जीवन से भी जुड़े रहे और राज्यसभा के सदस्य के रूप में राष्ट्र एवं समाज से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया।उन्होंने कहा कि वर्ष 1959 में उन्हें &OpenCurlyQuote;पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया&comma; जबकि वर्ष 1972 में &OpenCurlyQuote;उर्वशी’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह के दौरान शहर के कई साहित्यकार&comma; शिक्षामित्र विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह &OpenCurlyQuote;दिनकर’ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। समारोह में वक्ताओं ने दिनकर के साहित्य और उनके राष्ट्रप्रेम से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने का आह्वान किया।<&sol;p>&NewLine;

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