रसड़ा में बिना पंजीयन के ही चल रहे काेचिंग सेण्टर, शिक्षा के नाम पर गाेरखधंधा

<p><strong>बलिया&lpar;संजय कुमार तिवारी&rpar;&colon;<&sol;strong> जनपद के रसड़ा शहर में रिहायशी क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटर आम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। न तो इनका पंजीयन है और न ही इन्हें खोलने के लिए कोई स्थान सुनिश्चित किया गया है। यह कोचिंग संचालक अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं जबकि इन्होंने कोचिंग सेंटर संचालित करने के लिए संस्थान का पंजीयन तक नहीं कराया है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>कोचिंग सेंटर पर वाहन खड़े करने के लिए पार्किंग व्यवस्था भी नहीं है। शहर के अधिकांश वार्डों में बिना पंजीयन वाले कोचिंग सेंटर रहवासियों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। खास बात यह है कि कोई भी शासकीय शिक्षक बच्चों को ट्यूशन नहीं पढ़ा सकता&comma; लेकिन शहर के अधिकांश शासकीय शिक्षक अपने घरों पर बेधड़क ट्यूशन पढ़ा रहे हैं&period; एक अनुमान के मुताबिक शहर व शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्राें में करीब 200 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं।<br &sol;>&NewLine;आपकाे बताते चलें कि क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित कोचिंग संस्थानों पर जिलाधिकारी का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा है। पिछले वर्ष गुजरात में हुई घटना के बाद डीएम ने समिति गठित कर कोचिंग संस्थाओं की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। बावजूद अब तक समिति धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रही है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>आलम यह है कि छोटे-छोटे कमरों मे संचालित कोचिंग संस्थानों में छात्रों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं है। मानक के रुप में एक भी मानक कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। क्षेत्र के गली-गुच्ची में कुकुरमुत्ता की भांति दर्जनाें काेचिंग अवैध रुप से चल रहे हैं। ऐसा लगता है कि इन संचालकाें काे कानून से काई भय नहीं बल्कि कानून काे ही इन संचालकाें से भय है तभी ताे ये अवैध रुप से निडर हाेकर काेचिंग चला रहे हैं। कोचिग संस्थानों के संचालक भारी भरकम शुल्क तो लेते हैं&comma; लेकिन व्यवस्था के नाम पर वहां कुछ नहीं दिखता&period;बहुत से कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण भी नहीं है। यही नहीं कई कोचिंग संस्थानों में फायर फायटिंग यंत्र भी नहीं लगाए गए हैं। अवैध कोचिंग संस्थानों का जाल नगर के स्टेशन राेड़ से हाेते हुए भगत सिंह तिराहा&comma; मिशन राेड़&comma; जुगनू अस्पताल गली&comma; पानी टंकी राेड़&comma; सदर अस्पताल के पीछे &lpar;काेचिंगाें की मेला लगी है&rpar; &comma;ठाकुरबाड़ी गली डुमडेरवा व अन्य क्षेत्राें में फर्जीवाड़ा का काम चल रहा है। फर्जी काेचिंग में प्रीमियर काेचिंग&comma;ब्राइट फ्यूचर&comma;विजार्ड टेक के साथ साथ शहर में शिक्षा के नाम पर अवैध रुप से धन उगाही का काम किया जा रहा है। बतादें कि इन काेचिंगाें का छत इतना कमजाेर है कि वाे कभी भी खण्डित हाेकर टूट सकता है&period; प्रशासन के इस चुप्पी से भविष्य में गुजरात काेचिंग काण्ड रसड़ा नगर के काेचिंगाें में भी हाे सकता है&period; प्रशासन के हाथ-पर-हाथ धरे रहने से छात्राें की जान भी जा सकती है&period; अगर अब भी प्रशासन ने काेई एक्शन नहीं लिया ताे समाज में हाेने वाले कारणाें का वजह स्वयं हाेगा।<&sol;p>&NewLine;

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