पिता की अर्थी को कंधा देती दोनों बेटी ने पिता की दिया मुखाग्नि

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना सिटी&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>बाहरी बेगमपुर निवासी विनय कृष्ण मौर्य की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया।बेटी ने पूरी की पिता की आखिरी इच्छा तो भर आई सबकी आंखें&comma; हार्ट की लंबी बीमारी से निधन के बाद दी बड़ी बेटी ने मुखाग्नि&comma;पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी&comma; फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया।बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि जब मुखाग्नि देने का समय आया&comma; तो माहौल पूरी तरह शांत हो पिता की अर्थी को कंधा देती दोनों बेटी<br>19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को पटना सिटी के बाहरी बेगमपुर निवासी विनय कृष्ण मौर्य की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी&comma; बल्कि परंपराओं को चुनौती देने और समाज में नई सोच को जन्म देने वाला क्षण बन गई। जब अर्थी उठी&comma; तो सबसे आगे बढ़ीं उनकी बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि । आंसुओं से भरी आंखें&comma; लेकिन कदमों में दृढ़ता। सोनम ने वही किया जो उनके पिता जीवनभर कहते रहे थे कि &&num;8216&semi;मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है।विनय कृष्ण मौर्य लंबे समय से हार्ट की बीमारी से से जूझ रहे थे। बीमारी के दौरान वे अक्सर अपनी इच्छा जताते थे कि उनकी अंतिम यात्रा में उनकी बेटी ही कंधा दे और मुखाग्नि भी वही करे।पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी&comma; फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जब मुखाग्नि देने का समय आया&comma; तो माहौल पूरी तरह शांत हो गया। कांपते हाथों लेकिन मजबूत इरादों के साथ बड़ी बेटी कोमल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं&comma; लेकिन उन आंसुओं में गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था।इस फैसले में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बना। बल्कि पूरा समर्थन भी दिया। पटना सिटी के कुशवाहा बालिका उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर विनय कृष्ण मौर्य छात्राओं को शिक्षा दे रहे थे ۔लंबे समय से एक शिक्षक की भूमिका में छात्राओं को विद्यालय में पढ़ाया करते थे&comma; अचानक निधन हो जाने के बाद छात्राओं में भी मायूसी छा गई है विनय कृष्ण मौर्य शिक्षक के साथ एक समाज सेवी भी थे हमेशा दूसरों की मदद करना उनकी पहली प्राथमिकता रहती थी ۔<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उनके इस दुनिया से अचानक जाने से सभी लोग अचंभित हैं &comma;सभी लोगों के बीच बे उनलोगों के दिल में अपनी पहचान बन चुके थे ۔उनकी अंतिम यात्रा में शुभचिंतकों के साथ समाजसेवी &comma;शिक्षाविद&comma;पूर्व डिप्टी में संतोष मेहता &comma;पूर्व पार्षद शिव मेहता &comma;पटना नगर निगम वार्ड संख्या 62 के पार्षद प्रतिनिधि उमेश मेहता&comma;के साथ पूरे परिवार के लोग शामिल हुए&comma;यही इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू है&comma; जहां रिश्तों ने परंपराओं से ऊपर उठकर इंसानियत और समानता को चुना।आने वाली पीढि़यों के लिए बनी प्रेरणा समाज में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। लोग कहने लगे कि यह सिर्फ एक बेटी का साहस नहीं था&comma; बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश था। यह विदाई साबित करती है कि बेटियां भी उतनी ही सक्षम हैं जितने बेटे । यह क्षण परंपराओं को चुनौती देने और नई सोच को जन्म देने वाला था।पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का यह साहसिक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।साभार<&sol;p>&NewLine;

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