बिहार सरकार सहित अपर सचिव के के पाठक नित्य नए फरमान के साथ शिक्षा में सुधार नहीं

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;mark><&sol;strong> बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव के के पाठक के नये नये फरमान के बाबजूद जिले में कई विद्यालयों के छात्र आज भी खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने पर विवश है। यहाँ तक की कड़कड़ाती ठंड में छात्र-छात्राएं बैठने के लिए अपने अपने घर से बोरे चट्टी लाकर शिक्षा ग्रहण करते है। ऐसा वाकिया और नजारा फारबिसगंज प्रखंड क्षेत्र के मानिकपुर प्राथमिक विद्यालय ढलाई दास टोला का है&comma; जहां चतरा के बने छोटे शेड में महादलित समुदाय के 179 बच्चे पढ़ाई करते है। ज्ञात हो कि विद्यालय की अपनी भूमि तो है परंतु भवन नहीं है। बच्चों और शिक्षक को विद्यालय तक जाने के लिए सरकारी रास्ता नहीं है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिससे बच्चों को पढ़ाई करने में काफी असुविधा होती है। एक ही चतरा के शेड में एक से पांच तक कि बच्चों का एक ब्लैक बोर्ड के सहारे पढ़ाई कार्य किया जाता है।जबकि कार्यरत शिक्षक की संख्या पांच है। खास बात यह है कि बिहार सरकार जहां खुले में शौच करने से रोकने के लिए शौचालय बनाने में लाखों कड़ोरो खर्च कर रही है वहीं इस विद्यालय में भवन व शौचालय नहीं हो विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। बच्चे बताते है बरसात के समय खड़े होकर समय बिताना पड़ता है। इस बाबत शिक्षक ने बताया कि विद्यालय की दुर्दशा की समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधि से लेकर विभागीय पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर गुहार लगाएं हैं&comma; परंतु किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया है। बिहार सरकार की विकास की पोल अररिया जिला में खुलती नजर आ रही है। जो महादलित बच्चे आज भी मूलभूत सुविधाओं से बंचित है।<&sol;p>&NewLine;

Related posts

बिहार की बेटियां हुनरमंद होंगी, आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनायेंगी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

बिहार पुलिस में सभी प्रकार की छुट्टियां अगले आदेश तक रद्द, 24 जुलाई से लागू होगा आदेश

राहुल गांधी नीट पर चर्चा से भाग रहे, छात्रों की आड़ में विपक्ष फैला रहा अराजकता : संजय सरावगी‎