सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान का हुआ आयोजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> à¤œà¤¿à¤²à¥‡ के सभी प्रखंडों के सामुदायिक क्षेत्र में उपस्थित लोगों को सिकलसेल एनीमिया के लिए जागरूक करने हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों को सिकलसेल एनीमिया से होने वाले नुकसान की जानकारी देते हुए संबंधित लोगों को नजदीकी अस्पताल में जांच करवाने की आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई। पूर्णिया जिले के के&period;नगर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बेगमपुर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आईसीडीएस&comma; पंचायती राज&comma; शिक्षा विभाग&comma; कल्याण विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के सामूहिक सहयोग से स्थानीय लोगों को सिकलसेल एनीमिया के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान क्षेत्र के महादलित समुदाय एवं सामाजिक लोगों द्वारा जागरूकता रैली और मध्य विद्यालय बेगमपुर खाता के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रभात फेरी का आयोजित किया गया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा उपस्थित लोगों और छात्र छात्राओं को सिकलसेल एनीमिया की पहचान और जांच करते हुए अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई। इस दौरान के&period; नगर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ भास्कर प्रसाद सिंह&comma; बीएचएम निशी श्रीवास्तव&comma; पिरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम लीड अवधेश कुमार&comma; स्थानीय झुन्नि पंचायत के मुखिया मो&period; इरसाद&comma; स्थानीय क्षेत्र की सभी एएनएम&comma; आंगनवाड़ी सेविका&comma; आशा कर्मी व आशा फेसिलेटर&comma; समुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी&comma; विकास मित्र&comma; उपमुखिया&comma; वार्ड सदस्य और विद्यालय शिक्षकगण आदि उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>खून में ऑक्सीजन की मात्रा होती है बाधित &colon; डॉ भास्कर<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>के&period;नगर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ भास्कर प्रसाद सिंह ने बताया कि सिकलसेल खून में उपलब्ध हीमोग्लोबिन की संरचना में परिवर्तन होने से खून में ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होने से होने वाला बीमारी है। इससे ग्रसित व्यक्ति के शरीर का कोई भी भाग किसी भी समय काम करना बंद कर सकता है। सिकलसेल एक अनुवांशिक बीमारी है जो ग्रसित व्यक्ति के जीवन अवधि को कम कर देता है। इससे सुरक्षा के लिए समुदाय के लोगों को स्थानीय अस्पतालों में अपने खून की जांच करानी चाहिए। समय पर इसकी पहचान होने पर इसका उपचार करते हुए ग्रसित व्यक्ति को सुरक्षित किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सभी स्वास्थ्य केंद्रों-उपकेंद्रों में उपलब्ध है जांच सुविधा &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>के&period;नगर बीएचएम निशि श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समुदायिक स्तर पर विद्यार्थियों के खून की जांच के लिए लगातार कार्यक्रम चलाया जाता है। बच्चों के खून में हीमोग्लोबिन स्तर को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी विद्यालयों में आयरन की गोली उपलब्ध कराई जाती है। सामान्य लोगों के हीमोग्लोबिन&sol;एनीमिया की जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र एवं सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में जांच किट उपलब्ध कराई गई है। इसकी जांच करवाते हुए लोग सिकलसेल-अनीमिया से सुरक्षित रह सकते हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आयरन की गोली उपलब्ध है। इसका उपयोग करने के साथ हरी सब्जियों का उपयोग करने पर लोग एनीमिया ग्रसित होने से बच सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सिकलसेल में लाल रक्त कोशिकाओं की जीवन अवधि हो जाती है कम &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पिरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम लीड अवधेश कुमार ने बताया कि सिकलसेल में लाल रक्त कोशिकाओं की जीवन अवधि सामान्य 120 दिनों के मुकाबले 30 से 40 दिन की हो जाती है। इससे ग्रसित मरीज के शारीरिक विकास की दर में परिवर्तन हो जाता है। हाथ-पैर में सूजन एवं दर्द&comma; सांस लेने में कठिनाई&comma; आंखों से कम दिखाई देना&comma;पक्षाघात&comma; पीलापन आदि इसकी पहचान के लक्षण हो सकते हैं। इसकी पहचान होने पर ग्रसित व्यक्ति को तत्काल नजदीकी अस्पताल से संपर्क आवश्यक जांच एवं उपचार करवानी चाहिए जिससे कि ग्रसित व्यक्ति स्वास्थ और सुरक्षित हो सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>आनुवांशिक रोग है सिकल सेल एनीमिया&comma; शारीरिक जटिलताओं से ग्रसित हो सकते हैं ग्रसित मरीज &colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा ने बताया कि सिकलसेल एक आनुवांशिक रोग है। जबतक खून की जांच नहीं होती इसका पता नहीं चल सकता है। परिवार के वैसे सदस्य जिनकी उम्र 0 से 40 वर्ष तक है उन्हें सिकलसेल की जांच जरूर करवानी चाहिए। जांच नहीं करवाने से सिकलसेल से ग्रसित मरीज किसी भी उम्र में शारीरिक जटिलताओं का सामना कर सकते हैं। परिवार के किसी भी व्यक्ति को सिकलसेल एनीमिया हो तो परिवार के अन्य सभी सदस्यों को भी इसकी जांच जरूर करवानी चाहिए। ग्रसित मरीजों का अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के उपयोग करते हुए सुरक्षित हो सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सिकलसेल एनीमिया के लक्षण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>•एनीमिया&sol;पीलापन दिखाई देना<br>•बार-बार संक्रमण&sol;बीमारी का होना<br>•थकान&comma; बुखार एवं सूजन तथा कमजोरी महसूस करना<br>•रोग प्रतिरोधक क्षमता का घट जाना<br>•जोड़ो में दर्द या सूजन<br>•छाती में दर्द&comma; सांस फूलना&comma; पीठ&sol;पेट में दर्द<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सिकलसेल एनीमिया से ग्रसित मरीजों को ध्यान रखना चाहिए कि &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>•ज्यादा गर्मी या धूप में बाहर नहीं निकले<br>•ज्यादा ठंड में बाहर जाने से बचे<br>•ज्यादा ऊंचाई वाले पहाड़ों&comma; हिल स्टेशन में न जाएं<br>•समय समय पर डॉक्टरों से आवश्यक सलाह ले<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बच्चों में सिकलसेल अनीमिया हो तो &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>•स्कूल में शारीरिक श्रम&sol;व्यायाम या भारी काम नहीं करना चाहिए<br &sol;>•कक्षा में पीड़ित बच्चे को बार बार पेशाब आने पर शिक्षक द्वारा उन्हें शौच जाने की अनुमति दे<br &sol;>•शिक्षकों को सिकलसेल एनीमिया के आपातकालीन लक्षणों की जानकारी उपलब्ध हो<&sol;p>&NewLine;

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