अरबाबे हल अकद क़ी ऐतिहासिक बैठक में अहमद वली फैसल रहमानी की बर्खास्तगी का एलान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फुलवारी शरीफ&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; गुरुवार को पटना में मौलाना मजहरूल हक ऑडिटोरियम में अरबाबे हल अकद क़ी ऐतिहासिक बैठक में अहमद वली फैसल रहमानी की बर्खास्तगी का एलान किया गया&period; विदेशी नागरिकता&comma; प्रमाणित आलिम-ए-दीन न होने और शरीयत के विरुद्ध विचारों के चलते उन्हें अमीर-ए-शरीअत के पद से हटाया गया&period; बैठक में मौलाना अनीसुर्रहमान क़ासमी को नया अमीर-ए-शरीअत चुना गया और सैकड़ों लोगों ने उनके हाथ पर बैअत की &lpar; मौलाना अनिसुर रहमान कासमी के नाम पर समर्थन जताया &rpar;&period; इस बैठक मे वक्ताओ ने कहा कि अमीर-ए-शरीअत वही हो सकता है जो शरीयत&comma; उसूल-ए-शरीअत और मिज़ाज-ए-शरीअत का गहरा जानकार हो&period; बैठक की अध्यक्षता हज़रत मौलाना मुफ्ती नज़र तौहीद मजाहिरी ने की और संचालन मौलाना मुफ्ती नाफ़े आरिफ़ी ने किया&period; बैठक में 600 से अधिक सदस्यों की उपस्थिति रही&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नाजिम इमारत शरिया मौलाना शिबली अल कासमी ने बताया कि इसमें वक्फ संशोधन क़ानून&comma; मुस्लिम एकता&comma; शिक्षा&comma; उर्दू और सामाजिक सुधार जैसे विषयों पर अहम प्रस्ताव पारित किए गए&period; वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को मुस्लिम विरोधी बताकर उसकी वापसी की मांग की गई&period; दीन और आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए मक्तब और इस्लामी वातावरण वाले संस्थानों की स्थापना पर बल दिया गया&period; उर्दू भाषा के प्रचार के लिए सरकारी स्तर पर ठोस योजना और बजट की मांग की गई&period; शादियों में फिजूलखर्ची और गैर-शरई रस्मों को समाप्त करने तथा आसान निकाह को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया&period; अंत में वक्ताओं ने इमारत-ए-शरीया को मुस्लिम उम्मत की अमानत बताते हुए इसे बचाने और संवारने की अपील की&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बैठक मे मौलाना अनीसुर्रहमान क़ासमी &lpar;अमीर-ए-शरीअत&comma; बिहार&comma; ओडिशा&comma; झारखंड&rpar;&comma; मौलाना मुहम्मद शिब्ली क़ासमी &lpar;नाज़िम&comma; इमारत-ए-शरीया&rpar;&comma; मौलाना मुहम्मद शाहिद नासरी अल-हनफी &lpar;मुंबई&rpar;&comma; मौलाना अबू ज़फ़र हसन नदवी अजहरी &lpar;मुंबई&rpar;&comma; मौलाना मुफ्ती नज़र तौहीद मजाहिरी &lpar;चतरा&comma; झारखंड&rpar;&comma; मौलाना मुफ्ती सुहैल अहमद क़ासमी &lpar;सदर मुफ्ती&comma; इमारत-ए-शरीया&rpar;&comma; मौलाना अब्दुल हक़ क़ासमी &lpar;पश्चिम चंपारण&rpar;&comma; मौलाना मुफ्ती शुऐब क़ासमी &lpar;चतरा&comma; झारखंड&rpar;&comma; मौलाना फज़ील अहमद नासरी &lpar;देवबंद&rpar;&comma; जनाब रागिब हसन &lpar;वरिष्ठ अधिवक्ता&rpar;&comma; मौलाना अरशद नदवी &lpar;दिल्ली&rpar;&comma; मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतरवेदी &lpar;मेरठ&rpar;&comma; मौलाना मुफ्ती मुहम्मद हुसैन क़ासमी &lpar;मधुबनी&rpar;&comma; मौलाना हाजी निसार अहमद क़ासमी &lpar;दरभंगा&rpar;&comma; मौलाना मुफ्ती फारूक &lpar;गया&rpar;&comma; मौलाना मुहम्मद रिज़वान क़ासमी &lpar;पूर्व प्राध्यापक&comma; दारुल उलूम वक़्फ देवबंद&rpar;&comma; मौलाना डॉ&period; मुहम्मद आलम क़ासमी &lpar;पटना&rpar;&comma; जनाब रियाज़ शरीफ &lpar;जमशेदपुर&rpar;&comma; मौलाना शकील अहमद क़ासमी &lpar;दरभंगा&rpar;&comma; मौलाना नसीम अख्तर &lpar;सीतामढ़ी&rpar;&comma; मौलाना अब्दुल माजिद क़ासमी &lpar;पटना&rpar;&comma; डॉ&period; जाकिर हुसैन &lpar;वैशाली&rpar;&comma; जनाब नजमुल हसन नजमी &lpar;महासचिव&comma; मजलिसे इस्तेक़बालिया&rpar;&comma;इस्लामिया ग्रुप का इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष शिक्षाविद हाजी खुर्शीद हसन&comma; मौलाना इफ्तिखार निजामी&comma; मौलाना मुहम्मद नसीम &lpar;अटकी&comma; रांची&rpar;&comma; मौलाना अबू क़मर नदवी&comma; क़ारी असजदुल हक़ ज़ुबैरी&comma; मौलाना आसिफ अंसार नदवी&comma; मौलाना मुज़फ्फर रहमानी &lpar;दरभंगा&rpar;&comma; मोहिउद्दीन खुसरु &lpar;कानपुर&rpar;&comma; मौलाना नसीम साहब&comma; आज़म अनवार साहब &lpar;हारून नगर&rpar; प्रमुख वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए&period;<&sol;p>&NewLine;

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