मोकामा में चल रहे AISF पटना जिला स्तरीय द्वि-दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का हर्षोल्लास के साथ समापन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>AISF पटना जिला स्तरीय द्वि-दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। शिविर के अंतिम दिन तीन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। प्रथम सत्र में &&num;8216&semi;वर्ग और जाति&&num;8217&semi; विषय पर पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ&period; सुधीर कुमार ने छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्ग और जाति का प्रश्न हमारे प्राचीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। प्रारंभिक मानव समाज में श्रम का विभाजन लोगों की क्षमताओं के आधार पर होता था&comma; किंतु समय के साथ इसमें जटिलताएँ बढ़ीं और जाति व्यवस्था जन्म आधारित तथा वंशानुगत हो गई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राजनीतिक लाभ के लिए भी जाति का उपयोग किया जाने लगा&comma; जिसके कारण समाज में जातीय उन्माद और संघर्ष बढ़े हैं। जातिगत भेदभाव की समाप्ति के लिए वैज्ञानिक शिक्षा&comma; सामाजिक चेतना और सामुदायिक जागरूकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>द्वितीय सत्र में &&num;8216&semi;शिक्षा और शिक्षा की राजनीति&&num;8217&semi; विषय पर कामरेड राज कुमार शाही ने अपनी बात रखते हुए कहा कि देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था औपनिवेशिक शिक्षा नीति का ही परिवर्तित रूप है। शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है तथा उसे कॉरपोरेट हितों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। वर्तमान समय में शिक्षा के उत्पादन&comma; वितरण और स्वरूप को बाज़ार की शक्तियाँ अपने हितों के अनुसार नियंत्रित कर रही हैं। आम जनता को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी दिशा में एक और कदम है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वतंत्र चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षा को बचाने के लिए छात्रों को संगठित संघर्ष करना होगा। उन्होंने AISF के ऐतिहासिक नारे—&&num;8221&semi;राष्ट्रपति हो या चपरासी की संतान&comma; सबको शिक्षा एक समान&&num;8221&semi;—का उल्लेख करते हुए समान शिक्षा प्रणाली लागू करने के लिए व्यापक छात्र एकता की आवश्यकता पर बल दिया। शिविर के अंतिम सत्र में छात्रों को AISF के इतिहास&comma; उसके संघर्षों और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने संगठन की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। द्वि-दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा &&num;8220&semi;हम होंगे कामयाब&&num;8221&semi; गीत गाकर तथा शिक्षा&comma; लोकतंत्र और छात्र अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत करने के संकल्प के साथ किया गया।<&sol;p>&NewLine;

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