अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने की तैयारी, एम्स पटना की लैब सेवाओं को मिलेगा नया गुणवत्ता मानक

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> मरीज के इलाज की दिशा तय करने में जांच रिपोर्ट की अहम भूमिका होती है&period; इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स पटना अपनी प्रयोगशाला सेवाओं को अधिक सटीक&comma; सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है&period; बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से ISO 15189 को लेकर चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है&period; प्रशिक्षण 11 अगस्त से शुरू होकर 14 अगस्त तक चलेगा&period;बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ&period; साधना शर्मा की पहल पर आयोजित इस प्रशिक्षण का संचालन मेडिकल एजुकेशन एंड लर्निंग प्वाइंट&comma; दिल्ली के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है&period; प्रशिक्षण का नेतृत्व डॉ&period; नीरज जैन कर रहे हैं&period;प्रशिक्षण का उद्देश्य लैब से जुड़े विशेषज्ञों और कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों की जानकारी देना है&comma; ताकि सैंपल की जांच से लेकर रिपोर्ट तैयार करने तक हर स्तर पर गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित की जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशिक्षण के दौरान क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम&comma; दस्तावेजीकरण&comma; जोखिम प्रबंधन&comma; क्वालिटी एश्योरेंस&comma; क्वालिटी इंडिकेटर्स&comma; कर्मचारियों की दक्षता&comma; प्रक्रिया नियंत्रण और एक्रेडिटेशन से जुड़े मानकों की जानकारी दी जा रही है&period; प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि गुणवत्ता किसी प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रहे&comma; बल्कि प्रयोगशाला की रोजमर्रा की प्रत्येक प्रक्रिया का हिस्सा बने।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में डीन अकादमिक प्रो&period; पूनम प्रसाद भदानी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो&period; डॉ&period; प्रशांत कुमार सिंह भी मौजूद रहे&period; दोनों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि कार्यक्रम एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगे&period;&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल के सहयोग और प्रोत्साहन से आयोजित किया जा रहा है&period; संस्थान में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के साथ आधुनिक गुणवत्ता प्रणालियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सैंपल से रिपोर्ट तक हर चरण पर गुणवत्ता पर जोर-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशिक्षण में केवल नियम और मानकों की जानकारी देने के बजाय इंटरैक्टिव सत्रों&comma; व्यावहारिक उदाहरणों और वास्तविक प्रयोगशाला परिस्थितियों के माध्यम से ISO 15189 को कामकाज में लागू करने की जानकारी दी जा रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सैंपल लेने&comma; उसे सुरक्षित रखने&comma; जांच करने&comma; परिणाम दर्ज करने&comma; रिपोर्ट तैयार करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तक पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता बनाए रखने के तरीके बताए जा रहे हैं&period; इसके साथ ही संभावित कमियों और जोखिमों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर करने के व्यावहारिक उपाय भी समझाए जा रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ&period; साधना शर्मा ने कहा कि प्रयोगशाला जांच मरीज के उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है&period; इसलिए जांच की गुणवत्ता केवल प्रयोगशाला की जिम्मेदारी नहीं है&comma; बल्कि यह सीधे मरीज की सुरक्षा और बेहतर उपचार से जुड़ा विषय है&period; सैंपल से लेकर अंतिम रिपोर्ट तक प्रत्येक चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है। एम्स पटना में चल रहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान की मरीज केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की प्रतिबद्धता को दर्शाता है&period; इससे लैब कर्मियों की तकनीकी और प्रबंधन क्षमता मजबूत होने के साथ डायग्नोस्टिक सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार की उम्मीद है।<&sol;p>&NewLine;

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