एम्स पटना ने एडीआईपी योजना के तहत स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से पीड़ित छह मरीजों को प्रदान की व्हीलचेयर, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>दिव्यांगजनों को सम्मानजनक&comma; आत्मनिर्भर एवं बेहतर जीवन प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को साकार करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान &lpar;एम्स&rpar; पटना के फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विभाग ने शुक्रवार को भारत सरकार की एडीआईपी योजना के अंतर्गत स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से पीड़ित छह मरीजों को व्हीलचेयर वितरित की। यह पहल केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि मरीजों को पुनः आत्मविश्वास&comma; गतिशीलता और सामाजिक जीवन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>व्हीलचेयर का वितरण एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीन &lpar;अकादमिक&rpar; प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; पूनम प्रसाद भदानी&comma; मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; प्रशांत कुमार सिंह&comma; फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विभागाध्यक्ष प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; संजय कुमार पांडेय और उपनिदेशक &lpar;प्रशासन&rpar; निलोत्पल बल उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित एडीआईपी योजना का उद्देश्य पात्र दिव्यांगजनों को वैज्ञानिक रूप से विकसित&comma; टिकाऊ एवं आधुनिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी कार्यक्षमता&comma; गतिशीलता&comma; आत्मनिर्भरता तथा जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार करना है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने कहा कि किसी भी मरीज का उपचार तभी पूर्ण माना जाता है जब वह पुनः आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि पुनर्वास केवल चिकित्सा सेवा नहीं बल्कि मरीजों की गरिमा&comma; आत्मविश्वास और समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी को पुनर्स्थापित करने की सतत प्रक्रिया है। उन्होंने पीएमआर विभाग की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास संस्थान की समग्र एवं संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; संजय कुमार पांडेय&comma; विभागाध्यक्ष&comma; फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन ने बताया कि एम्स पटना एडीआईपी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से पात्र मरीजों को बिना किसी आर्थिक बोझ के आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के चुनिंदा एम्स संस्थानों में शामिल एम्स पटना द्वारा इस योजना का सफल संचालन दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण एवं गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाओं के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना का फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विभाग बहुविषयक उपचार&comma; शीघ्र पुनर्वास&comma; आधुनिक सहायक तकनीकों तथा सामुदायिक पुनर्समावेशन पर आधारित मरीज-केंद्रित सेवाएं प्रदान कर रहा है। विभाग का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर&comma; सम्मानजनक और उत्पादक जीवन जीने के लिए सक्षम बनाना है।<&sol;p>&NewLine;

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