एम्स पटना में दो महीने में दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट, पहली बार मृतक दाता से किडनी प्रत्यारोपण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>एम्स पटना ने अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपना तीसरा लिवर ट्रांसप्लांट और पिछले दो महीनों में दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है। इसी बहु-अंग दान एवं प्रत्यारोपण प्रक्रिया के तहत संस्थान में पहली बार मृतक दाता से किडनी प्रत्यारोपण भी किया गया। इसके साथ ही एम्स पटना में अब तक किए गए किडनी प्रत्यारोपण की संख्या 15 हो गई है। दाता की दूसरी किडनी को स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन&comma; बिहार के माध्यम से राज्य में प्रत्यारोपण के लिए आवंटित किया गया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लिवर ट्रांसप्लांट 2 अक्टूबर 2026 को एक 29 वर्षीय पुरुष मरीज का किया गया जो विल्सन डिजीज के कारण अंतिम अवस्था के लिवर रोग से पीड़ित था। लगभग 12 घंटे चली इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया और मरीज की स्थिति फिलहाल स्थिर है। विशेषज्ञों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है। यह एम्स पटना का तीसरा लिवर ट्रांसप्लांट और पिछले दो महीनों में दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट है जो संस्थान में लिवर प्रत्यारोपण सेवाओं के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लिवर प्रत्यारोपण की सर्जरी सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; उत्पल आनंद के नेतृत्व में डॉ&period; कुणाल परासर&comma; डॉ&period; बसंत नारायण सिंह और डॉ&period; किसलय कांत की टीम ने की। एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन के दौरान आवश्यक चिकित्सा प्रबंधन एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; निशांत सहाय के नेतृत्व में डॉ&period; कुनाल सिंह और डॉ&period; रजनीश कुमार ने किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की देखभाल में क्रिटिकल केयर यूनिट की टीम जिसमें डॉ&period; अजीत कुमार शामिल रहे&comma; उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस बहु-अंग दान की शुरुआत बिहारशरीफ निवासी एक व्यक्ति की ब्रेन डेथ के बाद हुई। सीढ़ियों से गिरने के कारण उन्हें गंभीर सिर की चोट लगी थी और निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के अनुसार उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों की काउंसलिंग के बाद उनकी पत्नी और परिवार के सदस्यों ने अंग एवं ऊतक दान की सहमति दी। परिवार का यह निर्णय कठिन समय में मानवीय संवेदना और उदारता का उदाहरण बना। दाता का लिवर&comma; दोनों किडनी और दोनों कॉर्निया दान किए गए। लिवर और एक किडनी का प्रत्यारोपण एम्स पटना में किया गया जबकि दूसरी किडनी को राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन&comma; बिहार के माध्यम से राज्य में प्रत्यारोपण के लिए आवंटित किया गया। दोनों कॉर्निया भी दान किए गए जिससे जरूरतमंद मरीजों को दृष्टि प्रदान करने में मदद मिलेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दाता की एक किडनी का प्रत्यारोपण 19 वर्षीय युवती में किया गया जो लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी और डायलिसिस पर थी। यह एम्स पटना का 15वां किडनी प्रत्यारोपण और संस्थान में पहली बार मृतक दाता से किया गया किडनी प्रत्यारोपण है। किडनी प्रत्यारोपण की सर्जरी डॉ&period; कमलेश गुंजन के नेतृत्व में डॉ&period; नवीन कुमार&comma; डॉ&period; साकेत सिंह और डॉ&period; नितीश कुमार की टीम ने की। एनेस्थीसिया टीम में डॉ&period; अभ्युदय कुमार और डॉ&period; नीरज कुमार शामिल रहे। मरीज की प्रत्यारोपण से पहले की जांच&comma; उपचार की तैयारी और प्रत्यारोपण के बाद की चिकित्सा देखभाल नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो&period; अमरेश कृष्ण के नेतृत्व में डॉ&period; मेघा सहगल ने की।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस सफल बहु-अंग प्रत्यारोपण में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी&comma; रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी&comma; नेफ्रोलॉजी&comma; एनेस्थीसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर सहित कई विभागों की टीमों ने समन्वित रूप से काम किया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर&comma; नर्सिंग टीम&comma; ब्लड बैंक&comma; रेडियोलॉजी&comma; लैबोरेटरी&comma; ऑपरेशन थिएटर&comma; अस्पताल प्रशासन तथा अन्य सहयोगी विभागों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह पूरी प्रक्रिया कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो&period; डॉ&period; प्रशांत कुमार सिंह के सहयोग से संपन्न हुई। उप निदेशक &lpar;प्रशासन&rpar; श्री नीलोत्पल बल ने अंगदान&comma; अंगों के रिट्रीवल&comma; आवंटन&comma; परिवहन और प्रत्यारोपण से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दूसरी किडनी का राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन&comma; बिहार के माध्यम से राज्य में प्रत्यारोपण के लिए आवंटन अंगों के उचित और पारदर्शी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एम्स पटना ने मृतक दाता और उनके परिवार के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। परिवार द्वारा कठिन समय में लिया गया अंगदान का निर्णय कई मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद&comma; डायलिसिस से मुक्ति और दृष्टि वापस पाने का अवसर बना है। संस्थान ने इस पूरी प्रक्रिया में शामिल सभी चिकित्सकों&comma; नर्सिंग कर्मियों&comma; तकनीकी विशेषज्ञों&comma; ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों और प्रशासनिक टीमों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।<br &sol;>तीसरा लिवर ट्रांसप्लांट&comma; दो महीनों में दूसरा लिवर ट्रांसप्लांट&comma; 15वां किडनी प्रत्यारोपण और पहली बार मृतक दाता से किडनी प्रत्यारोपण एम्स पटना की बढ़ती प्रत्यारोपण क्षमता को दर्शाता है। संस्थान बिहार और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत एवं जीवनरक्षक प्रत्यारोपण सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है।<&sol;p>&NewLine;

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