एम्स पटना में साइबर हाइजीन, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल पर्सनल डेटा संरक्षण पर पहली बार जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान &lpar;एम्स&rpar;&comma; पटना ने शुक्रवार को साइबर हाइजीन&comma; साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल पर्सनल डेटा संरक्षण विषय पर अपनी तरह का पहला व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों&comma; छात्रों&comma; अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार&comma; डेटा गवर्नेंस तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम&comma; 2000 एवं डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन &lpar;DPDP&rpar; अधिनियम&comma; 2023 के अंतर्गत अनुपालन के प्रति जागरूक करना था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल के स्वागत संबोधन से हुई&comma; जिसमें उन्होंने चिकित्सा अभिलेखों एवं स्वास्थ्य सेवाओं के तीव्र डिजिटलीकरण के परिप्रेक्ष्य में साइबर जागरूकता के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक अनूप कुमार&comma; डीन &lpar;शैक्षणिक&rpar; प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; पूनम भदानी एवं उप निदेशक &lpar;प्रशासन&rpar; नीलोत्पल बल सहित संस्थान के संकाय सदस्य&comma; छात्र&comma; अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में चिकित्सा अधीक्षक अनूप कुमार&comma; डीन &lpar;शैक्षणिक&rpar; प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; पूनम भदानी एवं उप निदेशक &lpar;प्रशासन&rpar; नीलोत्पल बल ने रोगियों के डेटा की सुरक्षा तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन हेतु साइबर सुरक्षा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है तथा साइबर खतरों से बचाव&comma; रोगी गोपनीयता की रक्षा एवं डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बनाए रखने के लिए साइबर हाइजीन का सख्ती से पालन आवश्यक है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस मौके पर तकनीकी सत्रों का औपचारिक परिचय डॉ&period; पल्लम गोपी चंद&comma; उप संकाय प्रभारी आईटी द्वारा कराया गया। विशेषज्ञ सत्रों में एल्विन एंटनी&comma; Govern AI&comma; नई दिल्ली ने &OpenCurlyDoubleQuote;DPDP अधिनियम एवं नियम&colon; स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए अनुपालन” विषय पर प्रस्तुति दी&comma; जबकि साकेत झा&comma; वैज्ञानिक &OpenCurlyQuote;सी’&comma; सी-डैक पटना ने &OpenCurlyDoubleQuote;डिजिटल युग में भविष्य की सुरक्षा&colon; साइबर लचीलापन निर्माण” विषय पर व्याख्यान दिया&comma; जिसमें उभरते साइबर खतरों एवं उनसे निपटने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि साइबर सुरक्षा केवल आईटी प्रणालियों तक सीमित नहीं है&comma; बल्कि यह नैदानिक&comma; शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों का अभिन्न अंग है। साथ ही सुरक्षित डिजिटल व्यवहार&comma; जिम्मेदार डेटा प्रबंधन एवं सतत साइबर जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ&period; अभ्युदय कुमार&comma; आईटी संकाय प्रभारी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम के जरिए एम्स पटना ने एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण के निर्माण एवं संस्थान के सभी स्तरों पर साइबर लचीलापन सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।<&sol;p>&NewLine;

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