अमेरिका से उन्नत प्रशिक्षण लेकर लौटे एम्स के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ, अब बिहार में मिलेगी और बेहतर जॉइंट रिप्लेसमेंट सुविधा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> एम्स पटना के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर एवं यूनिट हेड डॉ&period; सुदीप कुमार ने अमेरिका के पेन मेडिसिन सेंटर&comma; फिलाडेल्फिया में तीन सप्ताह की अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल फेलोशिप सफलतापूर्वक पूरी की है&period; इस प्रशिक्षण के बाद अब एम्स पटना में कूल्हा और घुटना प्रत्यारोपण &lpar;जॉइंट रिप्लेसमेंट&rpar; की अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जून-जुलाई 2026 के दौरान आयोजित इस फेलोशिप में डॉ&period; सुदीप कुमार ने रिवीजन टोटल हिप रिप्लेसमेंट&comma; रिवीजन टोटल नी रिप्लेसमेंट तथा डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच हिप रिप्लेसमेंट की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया&period; यह प्रशिक्षण विश्व प्रसिद्ध जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ&period; नील पेरी शेठ के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फेलोशिप के दौरान उन्होंने 50 से अधिक हिप और घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी का अवलोकन किया तथा जटिल मामलों की सर्जिकल योजना&comma; इम्प्लांट चयन और मरीजों की देखभाल की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना के कार्यपालक निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर डॉ&period; सुदीप कुमार को बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव का सीधा लाभ बिहार के मरीजों को मिलेगा और उन्हें आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार अपने राज्य में ही उपलब्ध हो सकेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ&period; सुदीप कुमार ने कहा कि फेलोशिप के दौरान विशेष रूप से जटिल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी&comma; नई सर्जिकल तकनीकों और मरीजों की बेहतर देखभाल के आधुनिक तरीकों को सीखने का अवसर मिला&period; उन्होंने विश्वास जताया कि इस अनुभव से एम्स पटना में आने वाले मरीजों को अधिक सुरक्षित और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने बताया कि डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच तकनीक के माध्यम से मांसपेशियों को कम नुकसान पहुंचता है&comma; ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है और मरीज अपेक्षाकृत कम समय में सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। एम्स पटना लगातार अपने चिकित्सकों को देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित कर रहा है&comma; ताकि वैश्विक स्तर की चिकित्सा तकनीकों का लाभ बिहार और पूर्वी भारत के मरीजों तक पहुंचाया जा सके।<&sol;p>&NewLine;

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