नवजात बच्चे की पहली सांस बचाने के लिए एम्स में विशेषज्ञों ने किया मंथन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित। <&sol;strong>नवजात शिशुओं को जीवन की सुरक्षित शुरुआत दिलाने के उद्देश्य से एम्स पटना में नियोनेटोलॉजी विभाग के नेतृत्व में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स बिहार के सहयोग से एडवांस्ड नियोनेटल रिससिटेशन प्रोवाइडर कोर्स का आयोजन किया गया&period; इस विशेष प्रशिक्षण का मकसद जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में कठिनाई झेल रहे नवजात शिशुओं को समय पर जीवनरक्षक सहायता देने की क्षमता विकसित करना है&period;कार्यक्रम की खासियत &OpenCurlyDoubleQuote;गोल्डन मिनट” की अवधारणा पर आधारित प्रशिक्षण रहा&period; विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के पहले ही मिनट में सही तरीके से रिससिटेशन शुरू कर देने से नवजात के सुरक्षित जीवन की संभावना कई गुना बढ़ जाती है&period; उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण भविष्य में नवजात मृत्यु दर को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का उद्घाटन डीन &lpar;एकेडमिक्स&rpar; डॉ&period; संजय पांडे और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ&period; अनुप कुमार ने किया&period; उन्होंने कहा कि नवजात के जन्म के बाद के शुरुआती क्षण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी सही समय पर हस्तक्षेप करें तो कई नन्हीं जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। इस अवसर पर डॉ&period; निगम प्रकाश नारायण और प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ&period; चंद्रमोहन कुमार ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को नवजात आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार करते हैं&period; कार्यक्रम में सचिव डॉ&period; अमित कुमार और कोषाध्यक्ष डॉ&period; बिनय रंजन भी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया&comma; जिनमें पोस्टग्रेजुएट पीडियाट्रिशियन&comma; नियोनेटोलॉजिस्ट और स्टाफ नर्स शामिल थे&period; आधुनिक सिमुलेशन मॉडल्स के माध्यम से प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं के पुनर्जीवन की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया&period; प्रशिक्षण का नेतृत्व लीड इंस्ट्रक्टर डॉ&period; जगदीश प्रसाद साहू ने किया&period; उनके साथ डॉ&period; भवेश कांत&comma; डॉ&period; रमेश्वर प्रसाद&comma; डॉ&period; सौरभ कुमार&comma; डॉ&period; केशव पाठक&comma; डॉ&period; रिची दलई&comma; डॉ&period; मेघना नेमा और डॉ&period; बिनय रंजन ने भी प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।<&sol;p>&NewLine;

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