छह माह में चुनाव नहीं हुआ तो कोर्ट जाएंगे आफताब आलम, मुख्यमंत्री, निर्वाचन आयोग व नगर विकास विभाग को भेजा पत्र

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। <&sol;strong>फुलवारी शरीफ नगर परिषद को भंग कर प्रशासक की व्यवस्था लागू किए करीब चार माह गुजर चुके हैं और अब छह माह की अवधि पूरी होने में महज करीब दो माह शेष हैं&period; इसके बावजूद नगर परिषद चुनाव को लेकर अब तक कोई स्पष्ट कार्यक्रम सामने नहीं आने पर निवर्तमान अध्यक्ष अधिवक्ता आफताब आलम ने बिहार के मुख्यमंत्री&comma; राज्य निर्वाचन आयोग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र भेजकर संविधान के प्रावधानों के अनुसार समय सीमा के भीतर चुनाव कराने की मांग की है&period; उन्होंने चेतावनी दी है कि छह माह की निर्धारित अवधि में चुनाव नहीं कराया गया तो वह न्यायालय की शरण लेंगे&period;उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी करीब दो माह का समय है&period; यदि इस अवधि में चुनाव की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई और छह माह की निर्धारित अवधि बीत गई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे&period; उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो संविधान के अनुच्छेद 243यू के तहत जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आफताब आलम ने अपने पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243यू और बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 12&lpar;8&rpar; और 12&lpar;9&rpar; का हवाला दिया है&period; उन्होंने कहा कि नगर परिषद फुलवारी शरीफ&comma; खगौल और दानापुर निजामत समेत आठ नगर निकायों का क्षेत्र विस्तार और वार्डों के पुनर्गठन के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक 1558&comma; दिनांक 13 मई 2026 के माध्यम से निर्वाचित निकायों को भंग कर प्रशासक नियुक्त किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>छह माह में चुनाव का प्रावधान-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आफताब आलम के अनुसार&comma; बिहार नगरपालिका अधिनियम की धारा 12&lpar;8&rpar; में निकायों के पुनर्गठन और क्षेत्र विस्तार के बाद निर्धारित अवधि में चुनाव कराने का प्रावधान है&period; वहीं धारा 12&lpar;9&rpar; के तहत निर्धारित अवधि में आम निर्वाचन संभव नहीं होने की स्थिति में नगरपालिका को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था है&period; उनका कहना है कि प्रशासकीय व्यवस्था स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती और संविधान के अनुच्छेद 243यू के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्वाचित निकाय का गठन किया जाना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि 13 मई को निकाय भंग होने के बाद चार माह बीत चुके हैं&period; अब करीब दो माह ही बाकी हैं&period; ऐसे में सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तत्काल चुनाव की प्रक्रिया और कार्यक्रम स्पष्ट करना चाहिए&period; मतदाता सूची&comma; चुनाव कार्यक्रम&comma; नामांकन&comma; मतदान और मतगणना जैसी प्रक्रिया के लिए भी समय चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>किशन सिंह तोमर मामले का हवाला-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आफताब आलम ने अपने पत्र में उच्चतम न्यायालय के चर्चित किशन सिंह तोमर बनाम म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ द सिटी ऑफ अहमदाबाद मामले का हवाला देते हुए कहा है कि स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है&period; यह फैसला 19 अक्टूबर 2006 को आया था और AIR 2007 SC 269 में प्रकाशित हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243यू के तहत नगरपालिका के कार्यकाल और चुनाव संबंधी प्रावधानों की व्याख्या करते हुए समय पर चुनाव कराने की संवैधानिक अनिवार्यता पर जोर दिया था&period; आफताब आलम का कहना है कि इस न्यायिक व्यवस्था की रोशनी में निकायों में प्रशासकीय व्यवस्था को लंबे समय तक जारी रखने के बजाय निर्धारित समय सीमा में चुनाव कराना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>परिसीमन को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जाए-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आफताब आलम ने कहा कि फुलवारी शरीफ नगर परिषद का क्षेत्र विस्तार और वार्डों का पुनर्गठन चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है&period; परिसीमन और पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव को लेकर अनिश्चितता नहीं रहनी चाहिए&period; उन्होंने सरकार और निर्वाचन आयोग से मांग की कि यदि चुनाव में कोई कानूनी या प्रशासनिक अड़चन है तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जनता के लोकतांत्रिक अधिकार का सवाल-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति के पद या पूर्व जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का नहीं है&period; नगर परिषद के मतदाताओं ने अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा था&period; निर्वाचित व्यवस्था समाप्त होने के बाद जनता को फिर से अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार भी समय पर मिलना चाहिए&period; लंबे समय तक प्रशासक के माध्यम से नगर परिषद चलाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम होगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सरकार को स्थिति स्पष्ट करने की मांग-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आफताब आलम ने मुख्यमंत्री&comma; राज्य निर्वाचन आयोग और नगर विकास एवं आवास विभाग से मांग की है कि फुलवारी शरीफ नगर परिषद समेत भंग किए गए नगर निकायों के चुनाव को लेकर स्थिति तत्काल स्पष्ट की जाए और संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों के अनुरूप चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए।<&sol;p>&NewLine;

Related posts

आगामी लोक अदालत की तैयारियों को लेकर यातायात पुलिस कार्यालय में समीक्षा बैठक

राधेश्वर आजाद उर्फ अवधेश सिंह नेताजी की 78वीं जयंती समारोह मनाया गया

नदियों के बढ़ते जलस्तर के मद्देनजर जिलाधिकारी ने 24 घंटे तटबंध निगरानी एवं सभी आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित करने का दिया निर्देश