आचार्य महावीर प्रसाद हिन्दी साहित्य के नवीन युग के प्रवर्तक थे : शशि भूषण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>हाजीपुर&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> शहर के मेदनीमल स्थित टैगोर किड्स एंड हाई स्कूल में हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की जयंती मनाई गई। पुष्पांजलि अर्पित करते हुये हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं टैगोर स्कूल के निदेशक डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी हिन्दी साहित्य के नवीन युग के प्रवर्तक थे। इनके रचानों के व्यापकताओं को देख कर ही उनके समय को हम सभी द्विवेदी युग के नाम से जानते हैं। द्विवेदी जी सरस्वती पत्रिका का संपादन करते हुए हिन्दी की महान सेवा की। हिन्दी भाषा को व्याकरण की दृष्टि से सुव्यवस्थित करने तथा हिंद गध् में छाई हुई अराजकता को भी दूर करने में इन्होंने अहम भूमिका निभाई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इनकी मौलिक पुस्तकों में नाट्यशास्त्र&lpar;1904 ई&period;&rpar;&comma; विक्रमांकदेव चरितचर्या&lpar;1907 ई&period;&rpar;&comma; हिन्दी भाषा की उत्पत्ति&lpar;1907 ई&period;&rpar; और संपत्तिशास्त्र&lpar;1907 ई&period;&rpar; प्रमुख हैं तथा अनूदित पुस्तकों में शिक्षा &lpar;हर्बर्ट स्पेंसर के &&num;8216&semi;एजुकेशन&&num;8217&semi; का अनुवाद&comma; 1906 ई&period;&rpar; और स्वाधीनता &lpar;जान&comma; स्टुअर्ट मिल के &&num;8216&semi;ऑन लिबर्टी&&num;8217&semi; का अनुवाद&comma; 1907 ई&period;&rpar; प्रमुख हैं।इस कार्यक्रम में शामिल होनेवाले प्रमुख बुद्धिजीवियों में पिंकी कुमारी&comma; रेणु सिंह&comma; रूबी कुमारी&comma; सुष्मिता सिन्हा&comma;साक्षी प्रिया&comma;शबनम खानम&comma;स्वीटी सोनी&comma; लुबना नवाज&comma; नेहा कुमारी&comma; विवेक विशाल एवं कुंदन कुमार सहित स्कूल के सभी बच्चों ने भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;

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