फतेहपुर में आकार ले रहा भव्य सूर्य मंदिर, छठ तक श्रद्धालु कर सकेंगे पूजा-अर्चना

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> पटना के फतेहपुर में उत्तरवाहिनी पुनपुन नदी के तट पर करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है&period; करीब एक दशक से चल रहे निर्माण कार्य को गति देने में महाराष्ट्र से आए 25 से 30 कारीगर दिन-रात जुटे हैं&period; मंदिर की आकर्षक नक्काशी और साज-सज्जा को अंतिम रूप दिया जा रहा है&period; समिति का प्रयास है कि इस वर्ष छठ महापर्व तक मंदिर को इस स्वरूप में तैयार कर दिया जाए कि श्रद्धालु यहां भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना कर सकें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फतेहपुर में बन रहा यह सूर्य मंदिर अपनी भव्यता के साथ लोगों की आस्था का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है&period; मंदिर का निर्माण किसी एक व्यक्ति या संस्था के आर्थिक सहयोग से नहीं&comma; बल्कि स्थानीय लोगों और आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं की भागीदारी से आगे बढ़ रहा है&period; लोग अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार सहयोग राशि दे रहे हैं&period; इसी कारण निर्माण कार्य अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>आर्थिक सहयोग के अनुरूप आगे बढ़ रहा निर्माण-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सूर्य मंदिर निर्माण समिति के सचिव रजनीकांत सिंह ने बताया कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण मंदिर निर्माण में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है&period; श्रद्धालुओं से मिलने वाले सहयोग के आधार पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है&period; समिति की कोशिश है कि मंदिर को भव्य और आकर्षक स्वरूप दिया जाए&period; इसके लिए सदस्य लगातार प्रयास कर रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>महाराष्ट्र से आए मुख्य कारीगर तुकाराम बालाजी पंचाल ने बताया कि मंदिर की पूरी फिनिशिंग और अन्य बारीकियों को पूरा करने में अभी लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है&period; हालांकि&comma; छठ महापर्व तक मंदिर का स्वरूप काफी हद तक निखर जाएगा और श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर सकेंगे&period; उन्होंने बताया कि करीब 25 से 30 कारीगर लगातार मेहनत कर रहे हैं&period; मंदिर की बनावट&comma; नक्काशी और सजावट को आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>1964 से चली आ रही छठ पूजा की परंपरा-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फतेहपुर में उत्तरवाहिनी पुनपुन नदी के तट पर छठ पूजा की परंपरा वर्ष 1964 से चली आ रही है&period; मंदिरों के गांव के रूप में पहचान रखने वाले इस इलाके में शुरुआत के दिनों में ग्रामीण भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित कर छठ पूजा करते थे&period; इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों की ओर से दो दिवसीय नाटक का आयोजन भी किया जाता था&period; धीरे-धीरे इस परंपरा से लोगों का जुड़ाव बढ़ता गया और छठ के दौरान यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार इजाफा हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वर्तमान में फतेहपुर के अलावा पटना शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तरवाहिनी पुनपुन नदी के तट पर छठ पूजा करने पहुंचते हैं&period; छठ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की परंपरा के बीच सूर्य मंदिर का निर्माण इस स्थान की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है&period; सूर्यकला मंदिर से जुड़े सदस्य व्रतियों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटे रहते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मंदिर निर्माण में अध्यक्ष महेश कुमार सिंह&comma; सचिव रजनीकांत सिंह&comma; शत्रुघ्न सिंह&comma; ओम प्रकाश सिंह&comma; रंजन कुमार&comma; सत्येंद्र सिंह&comma; सुशांत कुमार&comma; अविनाश कुमार उर्फ बबनु&comma; राहुल कुमार और धर्मेंद्र कुमार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं&period; समिति को उम्मीद है कि जनसहयोग और कारीगरों की मेहनत से मंदिर जल्द ही पूर्ण भव्यता के साथ तैयार होगा और आने वाले समय में यह श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बनेगा।<&sol;p>&NewLine;

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