फुलकाहा में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा को लेकर निकल गई भव्य शोभा कलश यात्रा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर &colon;<&sol;strong> फुलकाहा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन सोमवार से शुरू होने जा रहा है। कथा के पहले दिन सुबह 09&colon;00 बजे शोभा कलश यात्रा निकाल कर नगर भ्रमण किया गया। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं के अलावा 51 महिलाओं ने कलश लेकर नए परिधानों में शोभायात्रा मैं शामिल हुए। जिन्होंने भागवत कथा की पवित्रता को उजागर करते हुए पूरे गांव में धूमधाम से कलश यात्रा निकाली। सार्वजनिक दुर्गा मंदिर फुलकाहा से यात्रा की शुरुआत पूजा-अर्चना से की गई&comma; जिसमें महिलाएं सिर पर कलश लेकर उत्साह और श्रद्धा से गाजे बाजे के साथ चल रही थी&comma; शोभायात्रा में भाग लेने वाले भक्तों ने श्री कृष्ण के जयकारे लगा रहे थे। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>शोभायात्रा दुर्गा मंदिर परिसर से प्रारंभ हुआ जो कि मंदिर&comma; होते हुए नया टोला मां भगवती मंदिर पहुंचकर कुआं से जल ले कर फुलकाहा थाना होते हुए कथा स्थल दुर्गा मंदिर परिसर में पहुंचकर संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने इसे शुभ और आशीर्वाद पूर्ण अनुभव के रूप में लिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग बुजुर्ग महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखकर आयोजन को लेकर सभी ने इसे अत्यंत सफल और प्रेरणादायक बताया। आयोजक मंडल के अनुसार श्रीमद्भागवत कथा वाचन प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक फुलकाहा दुर्गा मंदिर परिसर में किया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कथावाचिका राजयोगिनी बी&period;के प्रभा दीदी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसी कथा है&comma; जो जीवन के उद्देश्य एवं दिशा को दर्शाती है। इसे सुनने मात्र से सकारात्मक उर्जा से सशक्त हो जाता है। दीदी ने बताया कि श्रीकृष्ण ने भक्तों से हमेशा अच्छा कर्म करते रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि फल की चिंता छोड़ लोगों को कर्म पर ध्यान देना चाहिए। जो जिस प्रकार का कर्म करता है&comma; उस तरह का फल मिलता है। अच्छे कर्म करने वाले को हमेशा अच्छा फल भगवान देते है। हर मानव को अच्छा कर्म करना चाहिए। मानव जब विकारों के वशीभूत होकर कर्म करता है तो उन्हें दुख दर्द होता है। उन्होंने कहा कि पर-चिंतन पतन की जड़ है स्व चिंतन उन्नति की सीढ़ी है तो हमेशा स्व चिंतन करना है। जब मन को अच्छे विचारों से सुसज्जित करेंगे तो हमारा मन बहुत शक्तिशाली हो जाएगा और कार्य करने की क्षमता भी बढ़ जाएगी। इस कार्यक्रम का कुशलता पूर्वक मंच संचालन राजयोगी ब्रह्माकुमार अमन भाई के द्वारा की जाएगी।<&sol;p>&NewLine;

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