बिहार के 25 गुरुओं को किया गया सम्मानित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों के सम्मान में रविवार&comma; 06 सितंबर 2026 को पटना के जेडी विमेंस कॉलेज में गुरु शिक्षा सम्मान–2026 समारोह का भव्य आयोजन किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ईडीसी&comma; बिहार के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य&comma; समर्पण और अतुलनीय योगदान के लिए बिहार के 25 गुरुओं को सम्मानित किया गया।समारोह की अध्यक्षता पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो&period; उपेंद्र प्रसाद सिंह ने की। वहीं बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो&period; गिरीश कुमार चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बिहार सरकार के शिक्षा निदेशक प्रो&period; एन&period;के&period; अग्रवाल ने विशिष्ट अतिथि एवं विशेष वक्ता के रूप में समारोह को संबोधित किया।कार्यक्रम के संयोजक एवं ईडीसी के अध्यक्ष प्रो&period; कमल प्रसाद बौद्ध ने अतिथियों एवं सम्मानित शिक्षकों का स्वागत किया। समारोह में जेडी विमेंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ मीरा कुमारी&comma;EDC के महासचिव प्रो&period; एस के श्रीवास्तव&comma; विभागाध्यक्ष&comma; डीन सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद्&comma; बुद्धिजीवी&comma; शिक्षा-प्रेमी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गुरु की भूमिका और शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर चर्चा<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह को संबोधित करते हुए गणमान्य अतिथियों ने गुरु की भूमिका और शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि गुरु केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं&comma; बल्कि उनके व्यक्तित्व&comma; संस्कार और चरित्र निर्माण का मार्गदर्शक भी होता है।अतिथियों ने कहा कि बदलते समय और तकनीकी युग में शिक्षा के सामने कई नई चुनौतियां हैं&comma; लेकिन इन परिस्थितियों में भी शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है। शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों को सम्मान&comma; उचित संसाधन और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वक्ताओं ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों में अनुशासन&comma; नैतिक मूल्यों&comma; संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में शिक्षकों की अहम भूमिका है। आज के दौर में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं&comma; लेकिन तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं&comma; बल्कि शिक्षा को बेहतर बनाने का एक सहयोगी माध्यम है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह में वक्ताओं ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण पहचान रही है। आधुनिक शिक्षा के साथ इस परंपरा के मूल्यों और शिक्षकों के सम्मान को भी मजबूत बनाए रखना समय की आवश्यकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>25 शिक्षकों को मिला सम्मान<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 25 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले शिक्षकों में प्रो&period; उमेश प्रसाद&comma; प्रो&period; अशरफ अंजुम&comma; प्रो&period; अर्जुन रहमान&comma; रहमान खान&comma; प्रो&period; दिनेश नारायण वर्मा&comma; डॉ&period; रामनाथ सिंह&comma; प्रो&period; राजीव रंजन&comma; प्रो&period; रविकांत&comma; प्रो&period; जितेंद्र रजक&comma; प्रो&period; मनोज कुमार&comma; प्रो&period; सहेली मेहता&comma; प्रो&period; ध्रुव नारायण सिंह&comma; डॉ&period; सहजानंद शर्मा&comma; डॉ&period; सादाबरीन अहमद&comma; डॉ&period; मनोज कुमार&comma; डॉ&period; राकेश कुमार सिंह&comma; डॉ&period; पंकज कुमार&comma; डॉ&period; अमलेश वर्मा&comma; डॉ&period; संगम भारती&comma; डॉ&period; हैदर&comma; डॉ&period; अस्मिता शाह&comma; डॉ&period; मोहम्मद मुजफ्फर इस्लाम&comma; डॉ&period; कुसुम लता कुमारी&comma; डॉ&period; मोहम्मद सोहराब तथा राघवेंद्र कुमार मणिकांत शामिल रहे।सम्मान समारोह में उपस्थित प्रमुख लोगों में प्रो&period; दिवाकर प्रसाद&comma; प्रो&period; कृष्णानंद&comma; डॉ&period; गम अंसारी&comma; डॉ&period; सुशील कुमार सिंह&comma; डॉ&period; प्रणव कुमार गुप्ता एवं मानवाधिकार टुडे के संपादक तथा वैशाली अंतरराष्ट्रीय विद्यापीठ के संस्थापक डॉ&period; शशि भूषण कुमार प्रमुख रहे।इस अवसर पर अतिथियों ने सम्मानित शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे सम्मान समारोह शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ समाज में शिक्षा और गुरु के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत करते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह के अंत में सभी सम्मानित शिक्षकों को सम्मान-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।कुल मिलाकर गुरु शिक्षा सम्मान–2026 समारोह शिक्षा&comma; शिक्षक सम्मान और गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी आयोजन बनकर सामने आया।<&sol;p>&NewLine;

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