एम्स पटना में 42.98 लाख के कैश घोटाले का खुलासा, निलंबित मुख्य कैशियर अनुराग अमन गिरफ्तार!

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> बुधवार को फुलवारी शरीफ थाना में एम्स पटना प्रशासन की ओर से एक लिखित आवेदन दिया गया&comma; जिसमें अस्पताल के वित्तीय लेनदेन में भारी गड़बड़ी का खुलासा किया गया है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 5 जनवरी 2026 को एम्स पटना के वित्त एवं लेखा अधिकारी की रिपोर्ट के माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि अस्पताल सूचना प्रणाली के अंतर्गत 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान अस्पताल द्वारा प्राप्त नगद राशि और बैंक में जमा की गई राशि के मिलान के क्रम में 44 लाख 50 हजार रुपये की नगद कमी पाई गई है। इससे पहले वित्तीय अनियमितता की आशंका के आधार पर 4 जनवरी 2026 को एम्स पटना के वित्त एवं लेखा विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति में कैश वॉल्ट का आकस्मिक भौतिक सत्यापन किया था&period; इस सत्यापन के दौरान मुख्य कैशियर अनुराग अमन&comma; जो कैश बोर्ड के संरक्षक थे और अस्पताल की नगद राशि बैंक में जमा करने के लिए उत्तरदायी थे&comma; स्वयं मौजूद भी थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आकस्मिक सत्यापन के समय कैश वॉल्ट में मात्र 1 लाख 51 हजार 280 रुपये नगद पाए गए&comma; जबकि 42 लाख 98 हजार 720 रुपये की नगद कमी स्पष्ट रूप से सामने आई&period; सत्यापन के दौरान मुख्य कैशियर अनुराग अमन ने स्वीकार किया कि उन्होंने कैश वॉल्ट से करीब 42 लाख 99 हजार रुपये की राशि निकाली थी। इसके बाद 5 जनवरी 2026 को अनुराग अमन ने अपने लिखित बयान में स्वीकार किया कि उन्होंने उक्त राशि विभिन्न तिथियों में अपनी पत्नी के बैंक ऑफ इंडिया खाते संख्या 579310510000994 में जमा की थी&period; उसी दिन संध्या में भी उन्होंने 42 लाख 99 हजार रुपये की नगद कमी की जानकारी प्रशासन को दी थी। प्रशासनिक दबाव के बाद अनुराग अमन द्वारा कुल 42 लाख 95 हजार रुपये की राशि तीन किस्तों में एम्स पटना के खाते में वापस जमा कराई गई&period; इसके बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स पटना प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। गुरुवार को निलंबित मुख्य कैशियर अनुराग अमन को फुलवारी शरीफ थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर थाना लाया&period; पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि संस्थान के एक कर्मचारी को वित्तीय दुरुपयोग से संबंधित प्रथम दृष्टया निष्कर्षों के आधार पर निलंबित किया गया है&period; संस्थान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है&period; संस्थान ने स्पष्ट किया है कि राशि की वापसी का अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा&period; एम्स पटना प्रशासन ने दो टूक कहा है कि वित्तीय कदाचार के प्रति संस्थान की नीति शून्य सहिष्णुता की है और जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी&period; संस्थान ने अपने सभी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।<&sol;p>&NewLine;

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