कालाजार और एचआईवी संक्रमित लोगों के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने जारी किया गाइडलाइन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कटिहार&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon; <&sol;strong>कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग कृतसंकल्पित है। इस दिशा में विभिन्न स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन &lpar;डब्ल्यूएचओ&rpar; ने विसरल लीशमैनियासिस &lpar;वीएल&rpar; और एचआईवी के सह संक्रमण से प्रभावित लोगों के इलाज के लिए अपने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये नए दिशानिर्देश मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर &lpar;एमएसएफ&rpar; और भागीदारों द्वारा भारत में किए गए एक अध्ययन के परिणामों और दूसरा इथियोपिया में ड्रग्स फॉर नेगलेक्टेड डिज़ीज़ इनीशिएटिव &lpar;डीएनडीआई&rpar; और भागीदारों द्वारा किए गए एक अध्ययन के परिणामों पर आधारित है। कालाज़ार के नाम से भी ज्ञात विसरल लीशमैनियासिस नामक रोग गर्म देशों में परजीवी से होने वाला एक उपेक्षित रोग है&comma; जो सैंडफ्लाइज़ द्वारा फैलता है। रोग के कारण बुखार आता है&comma; वज़न कम होता है और यदि इलाज किए बिना छोड़ दिया जाए तो यह घातक भी होता है। स्थानिक क्षेत्रों में रहने वाले विसरल लीशमैनियासिस के साथ एचआईवी से प्रभावित लोगों में एचआईवी से अप्रभावित लोगों की तुलना में विसरल लीशमैनियासिस विकसित होने की संभावना 100 से 2&comma;300 गुना अधिक होती है। विसरल लीशमैनियासिस-एचआईवी सह-संक्रमण के लिए पिछले बताए गए उपचार में 38 दिनों तक की अवधि में नियत समय के अंतर पर लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी &lpar;एमबिसोम&rpar; के इंजेक्शन हर दिन लगाना शामिल था। नए तरीके में एम्बिसोम और ओरल मिल्टेफोसिन के संयोजन का उपयोग किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप काफी बेहतर प्रभावकारिता दर हासिल हुई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>वीएल के 6 प्रतिशत मामले एचआईवी से संक्रमित&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ&period; जे&period; पी&period; सिंह ने कहा कि बिहार में कालाजार के सबसे अधिक मामले पाए जाते हैं। वर्तमान में कटिहार जिले में कालाजार संक्रमित कुल 20 मरीज उपलब्ध है। अनुमानित रूप से विसरल लीशमैनियासिस के 6 प्रतिशत मामले एचआईवी से सह-संक्रमित हैं। ये सह-संक्रमित रोगी उपेक्षित हैं और कलंकित हैं&comma; उन्हें इलाज के अच्छे परिणाम नहीं मिलते हैं और विसरल लीशमैनियासिस के लिए एक रिजरवायर के रूप में भी काम करते हैं&comma; जो देश में स्थायी उन्मूलन प्रयासों में बाधा बन रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रोगियों का इलाज साक्ष्य-आधारित तरीके से किया जाएगा&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>चिकित्सा सलाहकार और एमएसएफ में अध्ययन समन्वयक&comma; डॉ साकिब बुर्जा ने कहा कि भारत में पहली बार विसरल लीशमैनियासिस-एचआईवी सह-संक्रमण वाले रोगियों का इलाज साक्ष्य-आधारित तरीके से किया जाएगा। नैदानिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोणों से इन रोगियों को अत्यधिक कमजोर के रूप में पहचानने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इनके प्रबंधन में सुधार से रोगियों और विसरल लीशमैनियासिस उन्मूलन कार्यक्रम दोनों को लाभ होगा। वैसे तो अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। फिर भी इन रोगियों को कई जटिल चिकित्सा मुद्दों का होते हैं जिन्हें समग्र रूप से संबोधित करने की आवश्यकता होती है। जिसमें टीबी का एक बहुत अधिक प्रसार भी शामिल है। भारत में किए गए अध्ययन में छह महीने की अवधि में इस नए बताए गए इलाज के तरीके को पिछले उपचार के तरीके में 88 प्रतिशत की तुलना में 96 प्रतिशत प्रभावकारी पाया गया&comma; इलाज की अवधि महत्वपूर्ण रूप से पांच से दो सप्ताह तक कम हो गई। इथियोपिया में इस नए बताए गए इलाज के तरीके से चिकित्सा के अंत में &lpar;58 दिनों के बाद&rpar; 88 प्रतिशत प्रभावकारिता दर दिखाई गई थी&comma; जबकि इस समय किए जा रहे मानक उपचार की प्रभावकारिता इस परीक्षण में 55 प्रतिशत थी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>नया गाइडलाइन से रोगियों के जीवन में आयेगा सुधार&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीएनडीआई में लीशमैनियासिस और माइसेटोमा एनटीडी &lpar;नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिज़ीज़&rpar; की निदेशक डॉ&period; फैबियाना अल्वेस ने कहा कि नए डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देश एक महत्वपूर्ण कदम हैं जिनसे उन रोगियों के जीवन में काफी सुधार आएगा जो दोनों बीमारियों से प्रभावित हैं और जो कलंक&comma; बहिष्कार&comma; आय की कमी और बार-बार होने वाले नुकसान से पीड़ित हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एमएसएफ साउथ एशिया&comma; महानिदेशक&comma; डॉ फरहत मंटू कहती हैं कि एमएसएफ द्वारा हमारे सामाजिक मिशन के भाग के रूप में सबसे कमजोर आबादी और उपेक्षित बीमारियों में अनुसंधान में निवेश किया जाता है। इन सफलताओं का अर्थ यह भी है कि हमें क्षेत्र स्तर से कार्रवाई योग्य जानकारी पाने में और निवेश करना चाहिए जिससे हमारे रोगियों को नवीन&comma; संगत&comma; बेहतर गुणवत्ता और इलाज की सरल व्यवस्था के साथ उनका समर्थन किया जा सके। भारत&comma; इथियोपिया और अन्य देश जहां ये दोनों रोग स्थानिक हैं&comma; वहां अब डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाए गए नए उपचारों को अपनाने के लिए अपने स्वयं के उपचार दिशानिर्देशों को तत्काल अनुकूलित किया जाना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>निदेशक&comma; राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट और अध्ययन में प्रधान अन्वेषक&comma; डॉ कृष्णा पांडे ने कहा कि इलाज का यह नया तरीका एक बहुत अच्छी खबर है क्योंकि इससे इंजेक्शन योग्य दवाओं के उपयोग में कमी आती है और रोगियों के ठीक होने की संभावना को काफी बढ़ जाती है। इसमें 14 दिनों में तय समय पर इसे देने की सिफारिश की जाती है&comma; जो पहले 38 दिन था। हमें इस उपलब्धि पर गर्व है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विसरल लीशमैनियासिस के रोगियों को अभी भी बेहतर&comma; सुरक्षित और प्रभावकारी उपचार की आवश्यकता&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीएनडीआई में भारत और दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय निदेशक&comma; डॉ&period; कविता सिंह ने कहा कि विसरल लीशमैनियासिस के रोगियों को अभी भी बेहतर&comma; सुरक्षित और प्रभावकारी उपचार की आवश्यकता है। यही कारण है कि डीएनडीआई और उसके सहयोगी एक सुरक्षित और प्रभावी मौखिक रूप से दी जाने वाली दवा से उपचार विकसित करने के अपने प्रयासों को जारी रख रहे हैं&comma; जो विसरल लीशमैनियासिस से प्रभावित सभी लोगों तक पहुंच योग्य होगा। एमएसएफ-स्पेन के चिकित्सा निदेशक&comma; डॉ क्रिस्टियन कैसाडेमोंट ने कहा कि हमने एक बार फिर साबित किया है कि कई संस्थागत भागीदारों के साथ जटिल वातावरण में उच्च गुणवत्ता वाले शोध विकसित करना व्यवहार्य है और इसका एक बड़ा परिवर्तनकारी प्रभाव है। इन नए दिशानिर्देशों से हजारों सबसे उपेक्षित लोगों के जीवन और उनकी देखभाल की गुणवत्ता में पर्याप्त वृद्धि होगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भारत में इस अध्ययन को एमएसएफ-स्पेन द्वारा वित्तीय समर्थन दिया गया था&comma; जिसमें डीएनडीआई और नेशनल वेक्टर बॉर्न डिज़ीज़ कंट्रोल कार्यक्रम द्वारा दिया गया समर्थन शामिल था। इथियोपिया में किए गए अध्ययन को यूरोपीय संघ&comma; जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन &lpar;बीएमबीएफ&rpar; द्वारा केएफडब्ल्यू&comma; एमएसएफ इंटरनेशनल&comma; मेडिकोर फाउंडेशन&comma; लिकटेंस्टीन&comma; स्पेनिश एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट कोऑपरेशन और स्विस डेवलपमेंट कोऑपरेशन &lpar;एसडीसी&rpar; के माध्यम से आर्थिक रूप से समर्थन प्रदान किया गया था।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

केंद्र सरकार ने कई राज्यों के राज्यपाल बदले, बिहार को मिला नया राज्यपाल

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, सीएम नीतीश कुमार सहित एनडीए के सभी पांच उम्मीदवारों ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा‎

होली के जश्न में हादसा : हर्ष फायरिंग में एक की मौत, दूसरा घायल