केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने 100 करोड़ कोरोना वैक्सीन डोज पूरा होने पर प्रधानमंत्री मोदी और भारत वासियों को बधाई दी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;strong> केंद्रीय पर्यावरण&comma; वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले&comma; खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने 100 करोड़ कोरोना वैक्सीन का लक्ष्य पूरा होने के पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और समस्त भारतवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। इस को ऐतिहासिक करार देते हुए श्री चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वह कर दिखाया जिसको कभी असंभव माना जाता था। मोदी के असाधारण नेतृत्व&comma; हमारे वैज्ञानिकों&comma; चिकित्सकों&comma; कोरोना वॉरियर्स&comma; फ्रंटलाइन वर्कर्स के मेहनत और आम जनता के सक्रिय सहयोग से ही यह संभव को पाया है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>10 महीने में वैक्सीन तैयार कर अगले 10 महीनों में 100 करोड़ डोज देना अविश्वसनीय है &colon; अश्विनी चौबे<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>केंद्रीय मंत्री श्री चौबे ने कहा कि 16 जनवरी 2021 को कोरोना का पहला डोज देने के बाद 10 महीने के अंदर भारत ने 100 करोड़ डोज का लक्ष्य पूरा कर इतिहास रच दिया। संपूर्ण भारत में अब तक 30 करोड़ लोगों को दोनों दडोज और 70 करोड लोगों को सिंगल डोज लग चुका है। इसमें देश के 75&percnt; युवा आबादी को सिंगल डोज और 31&percnt; आबादी को दोनों डोज लग चुका है। 10 साल में विकसित की जाने वाली सामान्य वैक्सीन के अपेक्षा कोरोना जैसी वैक्सीन को प्रधानमंत्री मोदी के असाधारण नेतृत्व में भारत ने 10 महीने में तैयार करके अगले 10 महीनों में ही इसका 100 करोड़ डोज दे दिया जो अविश्वसनीय है। भारत जैसे मत विकासशील देश&comma; 130 करोड़ से ज्यादा की घनी आबादी&comma; विकासशील अर्थव्यवस्था और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी वाले देश में तो यह और भी दुर्लभ प्रतीत होता था। ऐसी उपलब्धि असाधारण व्यक्ति के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव है। मोदी ने अपने संकल्प से सिद्धि प्राप्त कर दुनिया को यह दिखा दिया कि भारत कुछ भी करने में संभव है। इसीलिए अगर लोग कहते हैं &&num;8220&semi;मोदी है तो मुमकिन है&&num;8221&semi; तो इसमें किसी को अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए&&num;8221&semi;।&nbsp&semi;<&sol;p>&NewLine;

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