सबडर्मल इम्प्लांट पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का समापन, डॉक्टरों को कराया गया प्रैक्टिकल अभ्यास

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> परिवार नियोजन सेवाओं को मजबूत करने और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से सबडर्मल सिंगल-रॉड इम्प्लांट पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया&period; प्रशिक्षण के समापन के साथ डॉक्टरों को इस नई गर्भनिरोधक तकनीक से जुड़ी थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल अभ्यास भी कराया गया। राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार द्वारा हाल ही में शुरू की गई सबडर्मल सिंगल-रॉड इम्प्लांट सेवाओं के विस्तार के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है&period; इसी क्रम में जिला स्वास्थ्य समिति पटना ने पीएसआई इंडिया के सहयोग से 9 और 10 मार्च को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया&period; इसमें ईएसआईसी बिहटा&comma; एनएमसीएच पटना और एम्स पटना के कुल 12 एमबीबीएस डॉक्टरों ने भाग लिया&period;<br>इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला लीड ट्रेनर के रूप में एम्स की डॉ&period; मुक्ता अग्रवाल और ईएसआईसी की डॉ&period; लता ने किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों को परिवार नियोजन के आधुनिक विकल्पों की जानकारी दी गई और उनके कौशल को विकसित करने के लिए व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया&period; एम्स में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ&period; संगम झा ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया&comma; जबकि पीएसआई इंडिया के बिहार स्टेट लीड सौरव तिवारी ने पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वय में अहम भूमिका निभाई&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि परिवार नियोजन की बेहतर सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने में प्रशिक्षित डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है&period; उन्होंने सबडर्मल इम्प्लांट जैसे आधुनिक गर्भनिरोधक विकल्प के विस्तार में प्रतिभागियों के प्रयासों की प्रशंसा की। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा देश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भनिरोधक के विकल्पों को बढ़ाने के लिए दो नए तरीकों को भी शामिल किया गया है&period; इनमें मेड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन एसीटेट सबक्यूटेनियस इंजेक्शन &lpar;एमपीए-एससी&rpar;&comma; जिसे अंतरा-एससी कहा जाता है&comma; और सबडर्मल गर्भनिरोधक इम्प्लांट शामिल हैं&period; <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इन तरीकों को सुरक्षित और प्रभावी माना जा रहा है&period; अंतरा-एससी इंजेक्शन से तीन महीने तक और सबडर्मल इम्प्लांट से लगभग तीन वर्षों तक अनचाहे गर्भ से सुरक्षा मिलती है। स्वास्थ्य मंत्रालय की इस पहल को देश के दस राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है&period; बिहार में इसे सितंबर 2023 में लागू किया गया था&period; राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार ने पायलट परियोजना के तहत पटना और भागलपुर को सबडर्मल इम्प्लांट सेवा के लिए तथा मुंगेर और शेखपुरा को एमपीए-एससी सेवा के लिए चयनित किया है। पहले चरण में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद अब इन सेवाओं का दायरा बढ़ाया जा रहा है&period; योजना के तहत 11 नए जिलों में सबडर्मल इम्प्लांट सेवा शुरू करने और 13 अन्य जिलों में एमपीए-एससी सेवा का विस्तार किया जाएगा&period; इसके साथ ही राज्य के कुल 28 जिलों में इन आधुनिक परिवार नियोजन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

मानव तस्करी रोकथाम पर एक दिवसीय कार्यशाला, ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ की घोषणा

जहानाबाद पहुंचे आईजी, एसपी कार्यालय का किया निरीक्षण

इनरव्हील क्लब के सम्मान समारोह में समाजसेवा व प्रशासन से जुड़ी महिलाएं सम्मानित