20 वर्ष पुराने हत्याकांड में दो दोषियों को आजीवन कारावास

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>शेखपुरा&comma; à¤‰à¤®à¥‡à¤¶ कुमार &colon; <&sol;strong>दो दशक पुराने चर्चित हत्याकांड में आज बड़ा फैसला सुनाते हुए शेखपुरा जिला न्यायालय ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सन्तोष कुमार तिवारी की अदालत ने सेशंस ट्रायल संख्या 506&sol;2010 में विस्तृत सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला &OpenCurlyDoubleQuote;रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में नहीं आता&comma; किंतु अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड आवश्यक है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह मामला 2 जुलाई 2004 का है। अरियरी थाना क्षेत्र के केमरा गांव में वीरेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में रमेश यादव एवं जय प्रकाश यादव उर्फ जाटो यादव को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान&comma; दस्तावेजी साक्ष्य एवं अन्य प्रमाण प्रस्तुत किए&comma; जिनके आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>गौरतलब है कि इससे पूर्व वर्ष 2006 में इसी मामले में एक अन्य अभियुक्त हरवंश यादव को दोषी ठहराया गया था&comma; जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के उपरांत आए इस फैसले को मृतक के परिजनों ने न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। न्यायालय ने दोनों दोषियों को धारा 302&sol;149 भा&period;दं&period;सं&period; के तहत आजीवन कारावास एवं ₹20&comma;000 जुर्माना &lpar;जुर्माना अदा नहीं करने पर 9 माह का सश्रम कारावास&rpar;की सजा&comma;धारा 27&lpar;1&rpar; आर्म्स एक्ट के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹5&comma;000 जुर्माना &lpar;डिफॉल्ट में 3 माह का सश्रम कारावास&rpar;&comma;धारा 148 भा&period;दं&period;सं&period; के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹500 जुर्माना &lpar;डिफॉल्ट में 8 दिन का सश्रम कारावास&rpar; की सजा सुनाई।<br>अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी। साथ ही&comma; पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि का समायोजन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत किया जाएगा। न्यायालय ने दोषियों को निर्णय की प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराने तथा आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूर्ण करने का निर्देश भी दिया है।<&sol;p>&NewLine;

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