ट्रूनेट मशीन से अब होगी टीबी रोगियों की जांच, बेहतर इलाज होगा आसान

&NewLine;<ul class&equals;"wp-block-list"><li>संचारी रोग पदाधिकारी ने किया ट्रूनेट मशीन से जांच प्रक्रिया का उद्घाटन<&sol;li><li>टीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा यह सरकारी प्रयास<&sol;li><&sol;ul>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;strong> जिले में टीबी मरीजों को अब ससमय व बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना आसान होगा। टीबी रोगियों की जांच के लिये ट्रूनेट मशीन उपयोग में लाये जायेंगे। इससे टीबी मरीजों के जांच के सटीक नतीजे प्राप्त हो सकेंगे। वहीं जांच रिपोर्ट के लिये भी लोगों का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसे लेकर शुक्रवार को जिला यक्ष्मा केंद्र में ट्रूनेट मशीन से जांच प्रक्रिया का विधिवत उद्घाटन किया गया। पूर्व में टीबी मरीजों की जांच के लिये सीबीनेट मशीन उपयोग में लाया जाता था। इसमें टीबी के गंभीर रोगियों का पता लगाना मुश्किल होता था। लिहाजा ऐसे रोगियों को जांच व इलाज के लिये दूर-दराज के चिकित्सकीय संस्थानों में हमारी निर्भरता बनी हुई थी। ट्रूनेट मशीन से जांच की सुविधा उपलब्ध होने से जिलेवासियों को होने वाली इस परेशानी से बचाया जा सकेगा। मौके पर डीपीएम एड्स अखिलेश्वर प्रसाद सिंह&comma; डीसी टीबी दामोदर शर्मा&comma; एसटीएस पिंकू कुमार साह&comma; गुणानंद साह&comma; एलटी शंकर प्रसाद&comma; मनोज गोस्वामी&comma; अशोक कुमार सहित अन्य मौजूद थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गंभीर टीबी रोगियों का पता लगाना होगा आसान &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ वाईपी सिंह ने बताया कि टीबी के गंभीर रोगियों का पता लगाने में ट्रूनेट मशीन बेहद उपयोगी है। इसकी मदद से जांच नतीजे प्राप्त होने में अपेक्षाकृत कम समय लगेंगे। समय पर रोग की पहचान होने से इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना भी आसान होगा। उन्होंने बताया कि ट्रूनेट मशीन में एमडीआर रोगी की जांच आसान होगी। एमडीआर को देशी भाषा में बिगड़ी हुई टीबी बोला जाता है। सीबीनेट मशीन में एमडीआर रोगियों का पता लगाना मुश्किल होता था। लिहाजा जांच के लिये मरीजों को बाहर भेजने के लिये मजबूर होना पड़ता था। एडीआर यानि मल्टीपल ड्रग रेजिस्टेंस टीबी में टीबी के इलाज में प्रथम लाइन मेडिसिन बेअसर हो जाता है। यह सामान्य टीबी के मुकाबले ज्यादा खतरनाक होता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कम समय में प्राप्त होंगे जांच के नतीजे &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला टीबी कोर्डिनेटर दामोदर शर्मा ने बताया कि ट्रूनेट मशीन की मदद से जांच के नतीजे कम समय में प्राप्त हो सकेंगे। ट्रूनेट मशीन से रोगियों की जांच के लिये लेब टेक्निशियन व एसटीएलएस को खासतौर पर प्रशिक्षित किया गया है। जिला यक्ष्मा केंद्र के प्रावैधिक शंकर प्रसाद व फारबिसगंज टीबी यूनिट के मुकेश पासवान को ट्रूनेट मशीन से जांच का जिममा सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मशीन से जांच प्रक्रिया शुरू होने के बाद टीबी के दो मरीज सामने आये। फारबिसगंज पीएचसी में भी ट्रूनेट मशीन की उपलब्धता की जानकारी उन्होंने दी।<&sol;p>&NewLine;

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