जीएमसीएच में उपलब्ध है डेंगू मरीजों का उपचार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> बदलते मौसम में लोगों के डेंगू ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है। समय पर डेंगू ग्रसित मरीजों की पहचान करते हुए उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। डेंगू एक गंभीर वायरल बीमारी है जो एडीज मच्छर के काटने से होती है। डेंगू ग्रसित होने के लक्षण दिखाई देने पर लोगों को तत्काल इसकी जांच करवानी चाहिए। जांच में पॉजिटिव होने पर मरीजों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल &lpar;जीएमसीएच&rpar; के डेंगू वार्ड में एडमिट करते हुए मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जिला डेंगू नियंत्रण कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2024 से 10 नवंबर 2024 तक पूर्णिया जिले के 102 लोग डेंगू बीमारी से ग्रसित हुए हैं। सभी डेंगू ग्रसित मरीजों को जीएमसीएच पूर्णिया के साथ साथ मरीजों की उपलब्धता के अनुसार अलग अलग जिलों के डेंगू नियंत्रण केंद्र द्वारा चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराते हुए सुरक्षित किया गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>प्रखंड और जिला स्तर पर होती है डेंगू मरीजों की टेस्टिंग &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने कहा कि तेज बुखार&comma; सिर दर्द&comma; शरीर में चिकत्ते का होना और मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होने पर संबंधित व्यक्ति डेंगू बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं। ऐसा लक्षण दिखाई देने पर प्रखंड स्तर पर मरीजों की एनएस 01 जांच की जाती है। एनएस 01 नेगेटिव होने पर संबंधित मरीजों को सामान्य उपचार सुविधा कराते हुए डेंगू से सुरक्षित किया जाता है। प्रखंड स्तर पर एनएस 01 जांच पॉजिटिव होने पर संबंधित मरीजों को विशेष जांच के लिए जीएमसीएच&comma; पूर्णिया रेफर किया जाता है जहां डेंगू वार्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीजों की एलिजा टेस्टिंग की जाती है। एलिजा टेस्ट में पॉजिटिव आने पर संबंधित मरीजों को डेंगू वार्ड में भर्ती करते हुए इलाज सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। पूर्णिया जिले में कभी भी किसी मरीजों की मृत्यु डेंगू के कारण नहीं हुई है। सभी मरीजों को आवश्यक उपचार कराते हुए बहुत जल्द डेंगू बीमारी से सुरक्षित होकर घर भेजा जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>डेंगू ग्रसित क्षेत्रों में किया जाता है फॉगिंग &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ मंडल ने बताया कि जिले के किसी क्षेत्र में डेंगू ग्रसित मरीज उपलब्ध होने पर संबंधित क्षेत्र में अन्य लोगों को डेंगू बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए कीटनाशक का छिड़काव &lpar;फॉगिंग&rpar; करवाई जाती है। फॉगिंग होने पर संबंधित क्षेत्र में डेंगू बीमारी के लिए जिम्मेदार एडीज मच्छर नष्ट हो जाता है। इसके लिए जिले के नगर निगम एवं नगर परिषद क्षेत्रों में नगर निगम और नगर परिषद प्रशासन द्वारा जबकि जिले के अन्य क्षेत्रों में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग द्वारा फॉगिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इससे संबंधित क्षेत्र में एडीज मच्छरों के अंडे और लार्वे का नष्ट हो जाता है और अन्य लोग डेंगू ग्रसित होने से सुरक्षित हो जाते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>डेंगू से सुरक्षा के लिए सावधानी आवश्यक &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने कहा कि डेंगू से सुरक्षा के लिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके लिए घर और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखना चाहिए। घरों के आसपास पानी के बहाव या रोकथाम नहीं होना चाहिए। सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए और मच्छरों से बचने के लिए मच्छर निरोधक का उपयोग करना चाहिए। लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल में डेंगू जांच करवाना चाहिए। इसके लिए सभी प्रखंड अस्पताल में डेंगू मरीजों के उपचार के लिए बेड सुनिश्चित रखा जाता है। समय पर जांच और आवश्यक उपचार करने से लोग डेंगू से सुरक्षित और स्वस्थ हो सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;

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