कालाजार को लेकर धमदाहा में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पूर्णिया&lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन वीएल ऑफ ड्रग्स फॉर नेगलेक्टेड डिसीसेस इनिशिएटिव के सहयोग से एनवीबीडीसीटी द्वारा अनुमंडलीय मुख्यालय धमदाहा के निजी होटल में जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के एमओआईसी&comma; बीसीएम एवं लैब टेक्नीशियन के लिए कालाजार बीमारी की जांच और उपचार को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह<br>एनसीवीबीडीसी कार्यक्रम और राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट &lpar;आरएमआरआई&rpar; के मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी &lpar;कालाजार&rpar; विभाग के एसपीओ डॉ अशोक कुमार&comma; क्षेत्रीय अपर निदेशक डॉ विजय कुमार&comma; सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी&comma; जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी&nbsp&semi; &lpar;वीबीडीसीओ&rpar; डॉ राजेंद्र प्रसाद मंडल&comma; राजेन्द्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज &lpar;आरएमआरआईएमएस&rpar; पटना के निदेशक डॉ कृष्णा पाण्डेय&comma; क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक कैसर इक़बाल&comma; ड्रग्स फॉर नेगलेक्टेड डिसीसेस इनिशिएटिव &lpar;डीएनडीआई&rpar; के संचालन प्रमुख अमित मल्लिक&comma; डॉ गौरव मित्रा&comma; वरीय क्लीनिकल प्रबंधक सेराज रजा एवं अनुराग सिंह&comma; आईईसी के राजकिशोर राय&comma; डीवीबीसीओ रवि नंदन सिंह&comma; डीवीबी सलाहकार सोनिया मंडल&comma; सिफार के धर्मेंद्र रस्तोगी&comma; गणेश जाना सहित जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी&comma; प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक&comma; लैब टेक्नीशियन&comma; राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सभी जिलास्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विभागीय  दिशा-निर्देश में चलाया जा रहा है कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम&colon; एसपीओ<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश से कालाजार जैसी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए हमलोग अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं। इस अंतिम चरण में हमें कुछ जटिल प्रक्रियाओं जैसे- प्लीहा&comma; आकांक्षा और उपचार में कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। फ़िलहाल यह विशेष परीक्षण केवल आरएमआरआई पटना में उपलब्ध है। लेकिन अब यह परीक्षण बिहार के सारण और पूर्णिया जिले में उत्कृष्टता केंद्र में उपलब्ध होंगे। इन दोनों जिलों में डीएनडीआई के सहयोग से यह केन्द्र बन रहा है। उक्त बातें राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी &lpar;कालाजार&rpar; डॉ अशोक कुमार ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि कालाजार रोग&comma; इसके लक्षण और इसको कैसे पहचान सकते हैं कि यह कालाजार ही है&comma; को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>स्वास्थ्य विभाग कालाजार उन्मूलन की ओर अग्रसर&colon; आरएडी<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>क्षेत्रीय अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ विजय कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहा कि कालाजार बीमारी को खत्म करने और बचाव को लेकर सभी स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े चिकित्सकों के लिए यह प्रशिक्षण काफ़ी महत्वपूर्ण है। अपना क्षेत्र कालाजार उन्मूलन की ओर अग्रसर है। à¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¿ दस हजार की आबादी पर एक à¤®à¤°à¥€à¤œ होने की स्थिति में कालाजार उन्मूलन माना जाता है। जिसको लेकर हम सभी को पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने की जरूरत है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बायसी की राह पर अन्य प्रखंडों को चलने की आवश्यकता&colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि फिलहाल पूर्णिया जिले में 15 कालाजार के मरीज़ हैं जिनका उपचार किया जा रहा। जबकि बायसी प्रखंड को कालाजार मुक्त पहले ही घोषित किया जा चुका है। बायसी की तरह ही हमलोगों को जिले के शेष बचे प्रखंडों को कालाजार मुक्त करने की ओर कदम बढ़ाना है। ताकि कालाजार मुक्त जिले की सूची में पूर्णिया का नाम शामिल हो सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ राजेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक बुख़ार रहने के साथ ही रोगी का वजन बढ़ने की बजाय&nbsp&semi;कम हो रहा है&comma; तो कालाजार होने की&nbsp&semi;प्रबल संभावना रहती है। कालाजार उन्मूलन में हम सभी की जिम्मेदारी काफ़ी महत्वपूर्ण है।&nbsp&semi;विभागीय स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश मिला हुआ है। जिस कारण यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसे आप सभी के सहयोग से हर हाल में पूरा किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सेंटर ऑफ एक्सीलेंस डीएनडीआई के दिमाग की उपज&colon; डॉ कृष्णा पाण्डेय<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>राजेन्द्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज &lpar;आरएमआरआईएमएस&rpar; पटना के निदेशक डॉ कृष्णा पाण्डेय ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस डीएनडीआई के दिमाग की उपज है। यह वीएल&comma; पीकेडीएल और एचआईवी वीएल के लिए दूर-दराज के उन रोगियों के उपचार की पूर्ति करेगा&comma; जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। सबसे अहम बात यह है कि कालाजार के मरीज़ों को अब आरएमआरआई पटना रेफर करने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि डीएनडीआई परियोजना को प्रायोजित कर रहा है। आरएमआरआई&sol;आईसीएमआर उत्कृष्टता केंद्र परियोजना के कार्यान्वयन में पूरी तरह से सहयोग कर रहा है।<&sol;p>&NewLine;

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