नवजात शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> जिले में गर्भवती महिला और नवजात शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग&comma; बिहार द्वारा पूर्णिया जिला को चिन्हित किया गया है। इस हेतु &&num;8216&semi;संकल्प प्रोजेक्ट&&num;8217&semi; के तहत इंटीग्रेटेड नवजात शिशु एवं गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में विशेषज्ञ स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जिले के सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल &lpar;जीएमसीएच&rpar; के एकेडमी भवन में आयोजित किया गया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इसके लिए इंक्लेन ट्रस्ट इंटरनेशनल&comma; नई दिल्ली के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ मनोज दास और यूनिसेफ बिहार के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ एस रेड्डी द्वारा राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ वी पी रॉय और आईसीएमआर नई दिल्ली के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ अमलीन शुक्ला की अध्यक्षता में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके लिए नेशनल और राज्य स्वास्थ्य विभाग के सभी विशेषज्ञों द्वारा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल &lpar;जीएमसीएच&rpar; पूर्णिया महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ ऋचा झा और शिशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ प्रेम प्रकाश के तत्वावधान में आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला में जिला स्वास्थ्य अधिकारी और सभी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और नेशनल स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत प्रखंड में कार्यरत स्वास्थ्य अधिकारियों को एकदिवसीय प्रशिक्षण जीएमसीएच&comma; पूर्णिया के प्रशिक्षण भवन में दिया गया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस दौरान सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया के साथ साथ जीएमसीएच पूर्णिया के प्रधानाचार्य डॉ हरी शंकर मिश्र&comma; अधीक्षक डॉ संजय कुमार&comma; उपाधीक्षक डॉ भरत कुमार&comma; एम्स पटना से डॉ सौरभ कुमार&comma; जीएमसीएच पूर्णिया के शिशु विशेषज्ञ डॉ प्रेम प्रकाश&comma; स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ ऋचा झा के साथ साथ जिला स्वास्थ्य समिति पूर्णिया के जिला कार्यक्रम प्रबंधक &lpar;डीपीएम&rpar; सोरेंद्र कुमार दास&comma; डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर&comma; डीएम&amp&semi;ई आलोक कुमार&comma; यूनिसेफ जिला सलाहकार शिवशेखर आनंद&comma; जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ सुधांशु शेखर और सभी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और महिला विशेषज्ञ उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गर्भवती महिला और शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित रखने के लिए लाभार्थियों को जागरूक करने की दी गई जानकारी &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आयोजित कार्यशाला में नेशनल और राज्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को जिले में होने वाले नवजात शिशु और गर्भवती महिला मृत्यु के कारण की जानकारी प्राप्त करते हुए इसे नियंत्रित रखने के लिए लाभार्थियों को आवश्यक चिकित्सिकीय सहायता और उपचार उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारण को चिन्हित करते हुए चिन्हित लाभार्थियों को आवश्यक मेडिकल सहायता समय से उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। इस दौरान नेशनल और स्टेट स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारण की जानकारी प्राप्त करते हुए <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इससे अन्य लाभार्थियों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक मेडिकल सहयोग उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए सभी प्रखंड के स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार के लिए उपलब्ध गर्भवती महिलाओं की समय पर प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करते हुए जांच के दौरान जटिल गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को बताया गया कि प्रसव पूर्व जांच के दौरान चिन्हित गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशु को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए लाभार्थियों द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव करवाते हुए महिला और जन्मजात शिशु की जन्म के तुरंत बाद स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> जटिल गर्भवती महिलाओं की प्रसव और उनके उपरांत जन्मजात शिशु की पहले माह आवश्यक चिकित्सिकीय जांच और उपचार उपलब्ध कराने से माँ और नवजात शिशु स्वस्थ और सुरक्षित रहते हैं। सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को इसके लिए चिन्हित लाभार्थियों को जागरूक करते हुए आवश्यक स्वास्थ्य सहायता नियमित रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए जिससे कि माँ और नवजात शिशु स्वस्थ और सुरक्षित रह सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अगले 03 वर्षों में नवजात शिशु और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर को किया जाएगा नियंत्रित &colon; सिविल सर्जन<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने कहा कि माँ और नवजात शिशु को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करते हुए चिन्हित महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके लिए राज्य और केंद्र स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जिले के सभी महिला एवं शिशु चिकित्सकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई है जिससे कि सभी गर्भवती महिलाओं की समय से प्रसव पूर्व जांच करते हुए चिन्हित लाभार्थियों को आवश्यक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लगातार 03 वर्षों तक स्वास्थ्य चिकित्सकों द्वारा गर्भवती महिला और नवजात शिशु मृत्यु दर का आंकलन करते हुए संबंधित लाभार्थियों को आवश्यक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने से जिले में नवजात शिशु एवं महिला मृत्यु दर को नियंत्रित किया जा सकेगा और गर्भवती महिला और नवजात शिशु स्वस्थ और सुरक्षित रह सकेंगे। डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित रखने के लिए जिला एवं प्रखंड चिकित्सकों और महिला चिकित्सकों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा आवश्यक जानकारी दी गई है। सभी प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा चिन्हित लाभार्थियों को आवश्यक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराते हुए जिले में महिला एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित रखा जाएगा जिससे माँ और बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित रह सकेंगे।<&sol;p>&NewLine;

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