आज है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विदेशों में भी है बहुत महत्व

&NewLine;<p><strong><em>मथुरा में मचती हैं धूम&comma; रात 12 बजे होता है जन्मउत्सव<&sol;em><&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>न्यूज़ क्राइम 24 डेस्क&colon;<&sol;strong> हिंदू धर्म में भगवान à¤¶à¥à¤°à¥€à¤•ृष्ण का जन्मदिन एक उत्सव के समान होता है&comma; इसे हमलोग पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं&period; भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हिंदू कैलेंडर के अनुसार&comma; भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था रोहिणी नक्षत्र में यह तिथि पड़ने के कारण ही इसे कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है&period; अब चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था&comma; इसलिए जन्माष्टमी के निर्धारण में रोहिणी नक्षत्र का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>गोपाल का जन्म उत्सव सिर्फ भारत ही नही बल्कि विदेश में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम रहती है&period; लोग पूर्व से ही इसकी तैयारी करने लगते हैं&period; मथुरा के सभी मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों व फूलों से सजाया जाता है&period; मथुरा में जन्माष्टमी पर आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को देखने के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से लाखों की संख्या में श्री कृष्ण भक्त पंहुचते हैं&period; भगवान के विग्रह पर हल्दी&comma; दही&comma; घी&comma; तेल&comma; गुलाबजल&comma; मक्खन&comma; केसर&comma; कपूर आदि चढ़ाकर लोग उसका एक दूसरे पर छिड़काव करते है&period; इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं तथा भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है&comma; इसके साथ ही रासलीला का आयोजन किया जाता है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>श्री कृष्ण की भक्ति भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय और भारतीय समुदाय के लोगों में भी है&period; जन्माष्टमी को पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं&period; मथुरा की जेल में&nbsp&semi;श्रीकृष्ण ने मध्यरात्रि में अपने अत्याचारी मामा कंस का विनाश करने के लिए माता देवकी की कोख से जन्म लिया था&period; इस लिहाज से पृथ्वी पर इसी दिन को कृष्ण भगवान का अवतरण का दिन माना जाता है&period; विदेश में भी इस दिन तरह-तरह के भव्य आयोजन किए जाते हैं&period; और श्री कृष्ण की भव्य पूजा की जाती है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भगवान कृष्ण का जन्म&nbsp&semi;भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए घरों और मंदिरों में मध्यरात्रि 12 बजे कृष्ण भगवान का जन्म उत्सव मनाते हैं&period; रात में जन्म के बाद दूध से लड्डू गोपाल की मूर्ति को स्नानादि कराने के बाद नए और सुंदर कपड़े और गहने पहनाकर श्रीकृष्ण का श्रृंगार किया जाता है&comma; फिर पालने में रखकर पूजा आदि के&nbsp&semi;बाद चरणामृत&comma; पंजीरी&comma; ताजे फल और पंचमेवा आदि का भोग लगाकर&nbsp&semi;प्रसाद के तौर पर बांटते हैं&period; जन्माष्टमी को स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय के लोग अपने अनुसार अलग-अलग ढंग से मनाते हैं।<br &sol;><&sol;p>&NewLine;

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