समय पर जांच और अस्पताल की देखभाल से बढ़ा भरोसा, सुरक्षित मातृत्व की ओर बढ़ रहा बिहार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> बिहार में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से महिलाओं के जुड़ाव में सकारात्मक बदलाव सामने आया है। राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे-6 &lpar;एनएफएचएस-6&comma; 2023—24&rpar; के आंकड़ों के अनुसार राज्य में संस्थागत प्रसव का अनुपात 76&period;2 प्रतिशत से बढ़कर 81&period;1 प्रतिशत हो गया है। यानी पहले की तुलना में अधिक महिलाएं सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच रही हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>गर्भावस्था के शुरुआती चरण में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। पहली तिमाही में एएनसी कराने वाली महिलाओं का अनुपात 52&period;9 प्रतिशत से बढ़कर 63&period;9 प्रतिशत हुआ है। वहीं किसी न किसी एएनसी सेवा से जुड़ने वाली महिलाओं का कवरेज 81&period;6 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत हो गया है। इससे गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच तक महिलाओं की पहुंच में सुधार का संकेत मिलता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>प्रसव के बाद भी बढ़ी देखभाल की पहुंच &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर प्रसव के बाद की देखभाल में भी दिखाई दे रहा है। बिहार में प्रसव के दो दिनों के भीतर माताओं को प्रसवोत्तर देखभाल मिलने का अनुपात 57&period;3 प्रतिशत से बढ़कर 69&period;9 प्रतिशत हो गया है। इसी अवधि में नवजात शिशुओं की देखभाल का अनुपात भी 59&period;3 प्रतिशत से बढ़कर 76&period;2 प्रतिशत हुआ है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि परिमल झा बताते हैं कि इन आंकड़ों को केवल प्रसव के आंकड़े के रूप में देखने के बजाय गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक स्वास्थ्य सेवाओं से महिला के निरंतर जुड़ाव के रूप में देखना महत्वपूर्ण है। शुरुआती एएनसी&comma; संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल में एक साथ सुधार मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को मजबूत होने का संकेत देता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>ग्रामीण बिहार में सरकारी संस्थानों की अहम भूमिका-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। राज्य में 57&period;5 प्रतिशत प्रसव सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हुए हैं। ग्रामीण बिहार में यह अनुपात 58&period;4 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं। संस्थागत प्रसव के माध्यम से महिलाओं को प्रसव के दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का अवसर बढ़ा है। मातृ स्वास्थ्य की नींव गर्भावस्था से पहले मातृ स्वास्थ्य में सुधार की तस्वीर गर्भावस्था से पहले के बदलावों से भी जुड़ी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एनएफएचएस-6 के अनुसार 20-24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष से पहले विवाह का अनुपात 40&period;8 प्रतिशत से घटकर 34&period;6 प्रतिशत हुआ है। यह किशोरियों और महिलाओं के स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अब निरंतरता को और मजबूत करना अगला कदम &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बिहार में महिलाओं को स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अब इस जुड़ाव को पूरी गर्भावस्था&comma; प्रसव और प्रसव के बाद की अवधि तक निरंतर बनाए रखना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। नियमित एएनसी&comma; संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल के साथ किशोरियों के स्वास्थ्य&comma; बेहतर पोषण&comma; परिवार नियोजन और गर्भधारण के बीच उचित अंतराल पर भी ध्यान देने से मातृ स्वास्थ्य की इस सकारात्मक यात्रा को और मजबूती मिल सकती है। एनएफएचएस-6 के आंकड़े बिहार में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच और उपयोग की तस्वीर सामने रखते हैं। आगे की दिशा हर महिला तक सही सेवा&comma; सही समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंच सुनिश्चित करने की है।<&sol;p>&NewLine;

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