दलित बच्चियों को पढ़ाकर खुद बनीं शिक्षिका, तीन दलित बेटियों को मिला सम्मान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजित।<&sol;strong> सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर संपतचक प्रखंड अंतर्गत एकतापुरम भोगीपुर में शिक्षा और सामाजिक बदलाव की मजबूत तस्वीर सामने आई&comma; जहां दलित बच्चियों को पढ़ाते हुए खुद शिक्षिका बनी तीन दलित बेटियों को सम्मानित किया गया&period; यह सम्मान कार्यक्रम समाजसेवी सुखदेव सिंह के मार्गदर्शन में चल रहे मिशन नौनिहाल सम्मान के तहत आयोजित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एकतापुरम भोगीपुर स्थित श्रीदेवाश्रय भवन परिसर में आयोजित माता सावित्रीबाई फुले शिक्षिका बिटिया जन-पुरस्कार समारोह में निःशुल्क शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली मिन्ता कुमारी पासवान&comma; तृषा कुमारी पासवान और अंजली कुमारी पासवान को मंच पर बुलाकर बिहार विधानसभा में सचेतक और विधायक अरुण मांझी के हाथों सम्मानित किया गया&period;कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत सामाजिक कार्यकर्ता रॉकी कुमार और स्थानीय वार्ड पार्षद नीतू कुमारी ने किया&period; कार्यक्रम की शुरुआत एकता स्थल पर सरदार वल्लभभाई पटेल और दशरथ मांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा माता सावित्रीबाई फुले की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई&period; इस अवसर पर सामाजिक एकता&comma; संघर्ष और शिक्षा के मूल्यों को याद किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मिशन नौनिहाल सम्मान के संस्थापक और संरक्षक सुखदेव सिंह ने कहा कि ये तीनों बेटियां न सिर्फ स्वयं शिक्षित हैं&comma; बल्कि दलित और वंचित वर्ग की बच्चियों को पढ़ाकर सावित्रीबाई फुले के विचारों को जमीन पर उतार रही हैं&period; सम्मान के दौरान बेटियों के चेहरे पर आत्मविश्वास और आंखों में भविष्य के सपनों की झलक साफ दिखाई दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार विधानसभा के सचेतक अरुण मांझी ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले ने जिस सामाजिक अन्याय और भेदभाव के खिलाफ शिक्षा की मशाल जलाई थी&comma; आज वही मशाल इन बेटियों के हाथों और तेज जल रही है&period; बेटियों की शिक्षा ही सशक्त&comma; समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की असली बुनियाद है&period; उन्होंने कहा कि जब दलित समाज की बेटियां खुद शिक्षिका बनकर आगे आती हैं&comma; तो यह सामाजिक क्रांति का सबसे मजबूत संकेत है। समाजसेवी एवं अधिवक्ता सत्यप्रकाश नारायण ने कहा कि सावित्रीबाई फुले सिर्फ एक शिक्षिका नहीं&comma; बल्कि सामाजिक बदलाव की प्रतीक थीं&period; आज इन बेटियों का सम्मान उनके विचारों की जीवंत जीत है&period; डॉ&period; आर&period; के&period; रवि और डॉ&period; शिवांगी ने कहा कि शिक्षा बेटियों को केवल रोजगार का साधन नहीं देती&comma; बल्कि उन्हें आत्मसम्मान&comma; निर्णय लेने की शक्ति और नेतृत्व क्षमता प्रदान करती है&period; ऐसी बेटियां ही आने वाले समय में समाज और देश को नई दिशा देंगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समाज तभी आगे बढ़ेगा जब दलित और पिछड़े वर्ग की बेटियां शिक्षित होकर खुद समाज को शिक्षित करेंगी&period; यही सावित्रीबाई फुले के सपनों को सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम में जितेंद्र पाठक&comma; मुकेश कुमार&comma; बिनेश पासवान&comma; मुकुल कुमार&comma; प्रियंका कुमारी&comma; मोटा भाई सहित बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावक उपस्थित रहे&period; सम्मान समारोह ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के रास्ते से ही दलित समाज की बेटियां अपनी पहचान&comma; सम्मान और भविष्य गढ़ रही हैं।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

डीएम और एसपी ने परीक्षा केंद्रों का किया औचक निरीक्षण, कदाचारमुक्त परीक्षा के लिए दिए कड़े निर्देश

राजस्व और आंतरिक संसाधन की समीक्षा की, अवैध खनन और लंबित मामलों पर जताई सख्ती

ICSE दसवीं बोर्ड परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में शुरू, पटना सिटी का एकमात्र परीक्षा केंद्र