बैकुंठधाम मंदिर में शिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बिहार&comma;  à¤¸à¥à¤§à¤¾à¤‚शु पांडेय<&sol;strong> बाबा धाम गौरी शंकर बैकुंठधाम मंदिर में शिवरात्रि के शुभ अवसर पर दिखा चहल पहल श्रद्धालुओं का आवागमन जारी<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बिहार के राजधानी पटना से महज 30 किलो मीटर पूर्व खुशरुपुर प्रखंड के बैकुंठधाम मंदिर में विराजित गौरी शंकर महादेव का पूजा अर्चना एवं जलाभीषेक करने लोग दूर दूर से आते<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><em><strong>मंदिर का मान्यता<&sol;strong><&sol;em><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>वाल्मीकि रामायण में वर्णित रामजन्म से पूर्व राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए श्रृंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था जिसमें बिहार प्रांत से उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या नगरी जाने के क्रम में बैकुंठ वन में शिव संकल्प कर भगवान भोले की स्थापना किया गया था वैसेही बिहार में पांच शिव संकल्प हुआ था जिसमें एक गौरी शंकर बैकुंठधाम मंदिर है<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>वहीं भगवान कृष्ण भी भगवान गौरी शंकर बैकुंठधाम मंदिर में पूजा अर्चना किए थे<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&lpar;1&rpar; जरासंध के उत्पति का रहस्य बैकुंठधाम मंदिर से है<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&lpar;2&rpar; रावण बध के बाद भगवान राम पर ब्रह्महत्या का श्राप के कारण भ्रमण के समय गंगा नदी के तीर पर रात्रि विश्राम कर सुबह में उठकर मंगला चरण पूर्वक पूजा अर्चना किए उस समय जिस स्थान पर रात्रि विश्राम किए उस स्थान का नाम राघवपुर रखाया जोकि धीरे धीरे आज लोग उसे राघोपुर जिला वैशाली के नाम से परिचित है<&sol;p>&NewLine;

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