अहंकार करने से कभी आत्मा का कल्याण संभव नही – उत्तम मार्दव धर्म

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना सिटी&comma; न्यूज क्राइम 24।<&sol;mark><&sol;strong> जैनियों के दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा पूरे भक्तिमय वातावरण में की गई। बुधवार को पटना के सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में जैन श्रद्धालुओं द्वारा भगवान का मंगल अभिषेक&comma; शांतिधारा&comma; दशलक्षण धर्म पूजा&comma; विधान व विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस पवित्र पर्व को लेकर हाजीगंज स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन गुरारा मंदिर&comma; गुलजारबाग कमलदह जैन मंदिर&comma; कचौड़ी गली स्थित जिनालय&comma; श्री पंचयाती मंदिर&comma; कांग्रेस मैदान स्थित पार्श्वनाथ मंदिर&comma; मीठापुर जैन मंदिर और मुरादपुर मंदिर समेत पटना के तमाम दिगम्बर जैन मंदिरों में पर्युषण पर्व की धूम है। संध्या भजन व मंगल आरती के आयोजन में जैन समाज के लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दूसरे दिन मनाया गया उत्तम मार्दव धर्म के बारे में जैन समाज से प्रवीण जैन ने बताया कि अच्छा रूप&comma; धन&comma; बुद्धिमत्ता&comma; समाज में स्थिति&comma; पारिवारिक स्थिति&comma; ज्ञान&comma; आकर्षक व्यक्तित्व अक्सर घमंड का कारण बनता है&comma; जहां व्यक्ति दूसरों से श्रेष्ठ होने का विश्वास करता है और दूसरों को नीचा देखता। मार्दव धर्म हमें सिखाता है कि सभी आत्माएं समान हैं और कोई भी दूसरे से श्रेष्ठ नहीं है। जिन वस्तुओं पर आपको गर्व है वे सभी वस्तुएँ आपको छोड़ देंगी या मरने पर आप उन्हें छोड़ने के लिए मजबूर हो जायेंगे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह अभिमान जो स्पष्ट रूप से हमारी अस्थायी वस्तुओं पर आधारित है&comma; हमारी आत्मा को बांधता है और हम इसकी मुक्ति में देरी करते है। जिस आत्मा को हम अभिमान के कारण हीन समझते हैं वह आत्मा पुरुषार्थ से मोक्ष प्राप्त कर सकती है। मार्दव का अर्थ है कोमलता या नम्रता जो हमारी आत्मा का सच्चा स्वभाव है न कि यह मिथ्या अभिमान। जो लोग इसे समझते हैं वे मोक्ष प्राप्त करेंगे और उत्तम मार्दव धर्म हमें यह समझने के लिए प्रोत्साहित करता है कि सभी आत्माएं सिद्ध के समान है तथा अहंकार भाव का त्याग ही सच्चा मार्दव धर्म है।<&sol;p>&NewLine;

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