फाइलेरिया से लड़ते-लड़ते जागा गांव, अब दूसरी बीमारियों को मिटाने में भी समुदाय बनेगा साथी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> जब हम अपनी सामुदायिक जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था को सक्रिय बनाने में सहयोग देते हैं&comma; तभी स्वस्थ और रोगमुक्त समाज की कल्पना साकार हो सकती है।” मुजफ्फरपुर के बोचहां प्रखंड की मझौलिया पंचायत की चांदनी कुमारी की यह बात फाइलेरिया उन्मूलन में समुदाय की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सीएचओ नेतृत्व रोगी हितधारक मंच-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&lpar;पीएसपी&rpar; अब समुदाय और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच प्रभावी कड़ी बन रहा है। बिहार के 21 जिलों में 311 पीएसपी सक्रिय हैं। इनमें 5&comma;610 सदस्य जुड़े हैं। जीविका समूह की महिलाएं&comma; जनप्रतिनिधि&comma; शिक्षक&comma; आशा&comma; एएनएम&comma; सीएचओ&comma; फाइलेरिया प्रभावित लोग समेत समाज के विभिन्न वर्ग इन मंचों का हिस्सा हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>संवाद से बढ़ा दवा सेवन का भरोसा-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पीएसपी की बैठकों में एमडीए के दौरान दवा सेवन को लेकर लोगों की शंकाओं और भ्रांतियों पर संवाद किया जाता है। कैमूर के कुदरा प्रखंड की डंगरी पंचायत में कुछ लोगों के दवा लेने से इनकार के बाद मंच ने सामुदायिक बैठक कर लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित किया। पीएसपी के माध्यम से दवा लेने से इनकार करने वाले 27&comma;023 लोगों को प्रेरित कर दवा सेवन कराया गया। वहीं एमडीए के दौरान दवा नहीं लेने वाले 4&comma;323 लोगों की पहचान कर उन्हें भी दवा सेवन के लिए प्रेरित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>मरीजों की जरूरतों में भी बना सहारा-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पीएसपी की भूमिका दवा सेवन तक सीमित नहीं है। इसके प्रयासों से 837 फाइलेरिया प्रभावित लोगों ने दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया&comma; जिनमें 520 को यूडीआईडी प्रमाणपत्र मिल चुका है। 18 लोगों को ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई। वहीं स्वास्थ्य विभाग और पीएसपी सदस्यों के सहयोग से 4&comma;200 लोगों को मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन का प्रशिक्षण दिया गया। अब मंचों की बैठकों में टीबी&comma; डेंगू&comma; कालाजार&comma; मलेरिया&comma; मातृ-शिशु स्वास्थ्य&comma; टीकाकरण और पोषण जैसे विषयों पर भी चर्चा हो रही है। यानी फाइलेरिया उन्मूलन से शुरू हुई सामुदायिक भागीदारी अब व्यापक स्वास्थ्य जागरूकता का आधार बन रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>उन्मूलन की दिशा में बढ़ा बिहार-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फाइलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ&period; अनुज रावत के अनुसार&comma; गांव स्तर पर पीएसपी की सक्रियता से एमडीए अभियान में पात्र लोगों तक दवा पहुंचाने और उसका सेवन सुनिश्चित करने में मदद मिली है। चांदनी कुमारी कहती हैं&comma; &OpenCurlyDoubleQuote;जब पूरा समुदाय किसी स्वास्थ्य कार्यक्रम को अपनी जिम्मेदारी मान लेता है&comma; तब बदलाव दिखाई देने लगता है।” बिहार में पीएसपी इसी सामुदायिक जिम्मेदारी को स्वास्थ्य व्यवस्था की ताकत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।<&sol;p>&NewLine;

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