25 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए तत्कालीन अनुमंडलीय शिक्षा पदाधिकारी को तीन साल की सजा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> निगरानी विभाग के ट्रैप मामले में तत्कालीन अनुमंडलीय शिक्षा पदाधिकारी&comma; दलसिंहसराय&comma; समस्तीपुर विनोद कुमार विमल को विशेष निगरानी न्यायालय&comma; पटना ने रिश्वत लेने का दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है&period; अदालत ने उन पर कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेष वाद संख्या 10&sol;2010 और निगरानी थाना कांड संख्या 13&sol;2010 से जुड़े मामले में विशेष न्यायाधीश&comma; निगरानी&comma; पटना अतुल कुमार सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई&period; वहीं धारा 13&lpar;2&rpar; सहपठित धारा 13&lpar;1&rpar;&lpar;डी&rpar; के तहत भी तीन वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है&period; जुर्माना नहीं देने पर चार माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विद्यालय का रजिस्टर लौटाने के लिए मांगी थी रिश्वत-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मामला वर्ष 2010 का है&period; अभियोजन के अनुसार तत्कालीन अनुमंडलीय शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल ने समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड और पटोरी थाना क्षेत्र स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय&comma; सरारी के प्रभारी प्रधानाध्यापक बैद्यनाथ पंडित प्रभाकर से विद्यालय के जब्त रजिस्टर वापस करने के एवज में 25 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बताया गया कि विद्यालय के रजिस्टर अधिकारी ने पहले जब्त किए थे&comma; लेकिन प्रधानाध्यापक को जब्ती की कोई प्राप्ति नहीं दी गई थी&period; शिकायत के बाद निगरानी विभाग ने ट्रैप की कार्रवाई की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>10 फरवरी 2010 को पटना के मीठापुर बस स्टैंड के पास अमन होटल के समीप एक बोलेरो वाहन में 25 हजार रुपये रिश्वत लेते विनोद कुमार विमल को निगरानी टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>11 गवाहों के बयान दर्ज-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों का परीक्षण कराया गया। निगरानी ट्रैप मामलों के विशेष लोक अभियोजक बिजय भानु उर्फ पुटटू बाबू ने अभियोजन की ओर से मामले की पैरवी की। अदालत के फैसले के बाद करीब 16 वर्ष पुराने इस रिश्वतखोरी मामले में तत्कालीन शिक्षा अधिकारी को सजा मिली है।<&sol;p>&NewLine;

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