‘द होप’ की विशेष पहल ने दिल जीत लिया, थैरेपी से बदल सकती है बच्चों की दुनिया

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> &&num;8220&semi;द होप&&num;8221&semi; संस्था ने 20 अप्रैल को एक ऐसी मिसाल पेश की&comma; जो ना सिर्फ विशेष बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी&comma; बल्कि समाज को भी संवेदनशील सोच की दिशा में प्रेरित कर गई। अनीशाबाद स्थित संस्था परिसर में आयोजित इस जागरूकता शिविर में ऑटिज्म&comma; एडीएचडी&comma; सेरेब्रल पाल्सी और डाउन सिंड्रोम जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञों ने खुलकर बात की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का शुभारंभ पटना नगर निगम की महापौर सीता साहु&comma; उपमहापौर रेशमी चंद्रवंशी और पूर्व महिला आयोग अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया।&period; मंच पर मौजूद विशेषज्ञों में डॉ शम्स आलम&comma; डॉ नौमान परवेज&comma; डॉ दिव्या ठाकुर&comma; डॉ अर्पणा कुमारी&comma; डॉ आशीष&comma; वार्ड पार्षद हरे राम और समाजसेवी सतीश कुमार बबलू शामिल रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>&OpenCurlyDoubleQuote;द होप” की संस्थापक ज्योति दास ने इस अवसर पर कहा –<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> &OpenCurlyDoubleQuote;विशेष बच्चों के लिए प्रारंभिक थैरेपी और सही दिशा में हस्तक्षेप ही उन्हें आत्मनिर्भर बना सकता है। जरूरी है कि अभिभावक इन बच्चों को लेकर खुलकर सामने आएं&comma; ताकि उन्हें सही समय पर सही सहारा मिल सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>शिविर में फुलवारी शरीफ सहित पटना के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों अभिभावकों ने भाग लिया।&period; डॉक्टरों और शिक्षाविदों की टीम ने उन्हें बताया कि विशेष बच्चों के भीतर छुपी संभावनाओं को निखारने के लिए नियमित चिकित्सा&comma; विशेष शिक्षा और मनोवैज्ञानिक सहयोग कितना आवश्यक है। &OpenCurlyDoubleQuote;इन बच्चों को नजरंदाज नहीं&comma; अपनाइए। छुपाइए नहीं&comma; आगे लाइए। सही ट्रीटमेंट दीजिए और समाज की मुख्यधारा से जोड़िए।<&sol;p>&NewLine;

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