जिले को 3, 456 टेलीकंसल्टेंसी के साथ मिला राज्य में पहला स्थान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar; <&sol;strong> संचार क्रांति के इस युग में राज्य की गरीब&comma; असहाय एवं जरूरतमंदों को चिकित्सीय सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से टेलीमेडिसीन कंस्लटेंसी के तहत अनवरत दी जा रही है। जिसका नतीजा यह है कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को घर बैठे या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों से चिकित्सा विज्ञान द्वारा उचित सलाह एवं परामर्श मिलने के साथ ही दवाओं की उपलब्धता से कई तरह की बीमारियों का उपचार हो रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार चिकित्सा के क्षेत्र में नित नई-नई तकनीकी व्यवस्था को सुदृढ करने में लगी हुई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> सिविल सर्जन डॉ&period; अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि विगत दिनों स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों से संबंधित समीक्षात्मक बैठक के दौरान जिलाधिकारी कुंदन कुमार द्वारा ई-टेलीकंस्लटेंसी को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया था। जिसके आलोक में फरवरी माह के तीसरे बुधवार को आयोजित टेलीकंस्लटेंसी स्पेशल ड्राइव में जिले के सभी हब और स्पॉक्स ने बेहतर टेलीमेडिसिन सेवाएं देते हुए राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रशिक्षित कर्मियों के माध्यम से कराया जाता है ई-टेलीकंस्लटेंसी&colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन क्रियान्वयन के तहत हब और स्पोक्स की प्रतिनियुक्ति की गई है। सबसे पहले मरीज के द्वारा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित एएनएम के पास कॉल किया जाता है। उसके बाद मरीजों से बातचीत के आधार पर मिली समस्या को एएनएम के द्वारा चिकित्सकों के पास ऑनलाइन भेजा जाता है। जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ई-टेलीमेडिसिन के माध्यम से मरीजों को चिकित्सीय परामर्श दिया जाता है। हालांकि इसके लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों से विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं एएनएम को स्वास्थ्य विभाग द्वारा चयनित करने के बाद ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन से संबंधित प्रशिक्षित किया जा चुका है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टेलीकंस्लटेंसी स्पेशल ड्राइव में पूर्णिया जिले के 3 हजार 456 मरीज़ों का उचित चिकित्सीय परामर्श के साथ ही किया गया निःशुल्क दवा का वितरण&colon; डीपीसी<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला योजना समन्वयक डॉ सुधांशु शेखर ने बताया कि प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे बुधवार को विशेष रूप से ई-टेलीकंस्लटेंसी का संचालन किया जाता है। विगत 21 फरवरी को टेलीमेडिसीन कंस्लटेंसी के माध्यम से पूरे बिहार में 47 हजार 749 ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज़ों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा चिकित्सीय परामर्श दिया गया था। जिसमें केवल पूर्णिया ज़िले में 3 हजार 456 मरीज़ों का उचित चिकित्सीय परामर्श के साथ ही निःशुल्क दवा का वितरण भी किया गया है जो सुनिश्चित टारगेट से 146 प्रतिशत अधिक रहा। स्वास्थ्य व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के तहत ई- टेलीमेडिसिन की सुविधाएं शुरू की गई हैं ताकि ज़िले के निवासियों को किसी भी बीमारी या संक्रमण को समय रहते उसका उपचार किया जा सके। इसके सफल क्रियान्वयन में प्रशिक्षित चिकित्सकों&comma; एएनएम एवं स्वास्थ्य कर्मियों को विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थापित किया गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जिले में 34 हब्स द्वारा 461 स्पोक्स के द्वारा होती है मरीजों की जांच&colon; डीएमएनई<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीएमएनई आलोक कुमार ने बताया कि टेलीमेडिसीन के द्वारा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे और बुजुर्गो सहित गर्भवती महिलाओं की जांच आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए जिले के सभी प्रखंडों में कुल 461 स्पोक्स सेंटर बनाए गए हैं। वहीं उपस्थित मरीजों की जांच के लिए 34 हब बनाया गया हैं। जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वीडियोकॉल के माध्यम से मरीजों या उनके परिजनों सहित स्पोक्स पर प्रतिनियुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी &lpar;सीएचओ&rpar; या एएनएम के द्वारा हब्स में उपस्थित विशेषज्ञ चिकित्सकों से ऑनलाइन माध्यम से संपर्क स्थापित किया जाता है। उनके द्वारा ऑनलाइन माध्यम से मरीजों की जांच करते हुए उन्हें दवा पर्ची उपलब्ध कराई जाती है। उसके अनुसार मरीजों को सीएचओ या एएनएम द्वारा आवश्यक दवा दी जाती है। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में मरीजों को आवश्यक इलाज के लिए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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