सिपारा बाइपास का बदहाल डायवर्सन बना जानलेवा, कीचड़ और धूल से लाखों लोगों का सफर बेहाल…

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजीत।<&sol;strong> पटना के न्यू बाइपास पर अनीसाबाद से सिपारा होते हुए सरिस्ताबाद-दीदारगंज एलिवेटेड सड़क निर्माण के दौरान बनाया गया डायवर्सन अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है&period; निर्माण एजेंसी की लापरवाही के कारण डायवर्सन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं&period; बारिश होने पर सड़क कीचड़ दलदल फिसलन में तब्दील हो जाती है और धूप निकलते ही धूल का इतना गुबार उड़ता है कि सामने से आने वाला वाहन तक दिखाई नहीं देता&period; इससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है&period; रोजाना नौकरीपेशा लोग&comma; छात्र-छात्राएं&comma; मरीज और ग्रामीण क्षेत्रों से पटना आने-जाने वाले हजारों लोग इसी रास्ते से सफर करते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह मार्ग पटना शहर को गया&comma; जहानाबाद&comma; औरंगाबाद&comma; नवादा&comma; डोभी तथा दक्षिण बिहार के कई जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख बाइपास मार्ग है&period; इस सड़क से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं&period; सुबह से देर रात तक लंबी दूरी की यात्री बसें&comma; सैकड़ो स्कूल बसें&comma; निजी स्कूलों के सैकड़ों छोटे बड़े वाहन&comma; एंबुलेंस&comma; मालवाहक ट्रक&comma; बालू और गिट्टी लदे भारी वाहन&comma; कंटेनर&comma; ट्रैक्टर&comma; मिनी ट्रक&comma; पिकअप वैन&comma; ऑटो&comma; ई-रिक्शा&comma; साइकिल रिक्शा&comma; ठेला&comma; मोटरसाइकिल और साइकिल सवार इसी मार्ग का उपयोग करते हैं&period; इसके अलावा रोजाना नौकरीपेशा लोग&comma; छात्र-छात्राएं&comma; मरीज और ग्रामीण क्षेत्रों से पटना आने-जाने वाले हजारों लोग इसी रास्ते से सफर करते हैं&period; राजधानी पटना में पटना के दक्षिणी इलाकों से आने वाले हजारों लोग इसी बाईपास के सहारे राजधानी में प्रवेश करते है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अनीसाबाद बेउर मोड़ से आगे इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के समीप&comma; जहां एलिवेटेड सड़क के पिलरों का निर्माण चल रहा है&comma; वहां दोनों ओर बनाए गए डायवर्सन में बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं&period; बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती। वाहन चालक जैसे ही गड्ढे में उतरते हैं&comma; उनका संतुलन बिगड़ जाता है। सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों&comma; साइकिल सवारों और ई-रिक्शा चालकों को होती है&period; कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं और छोटे-बड़े वाहन फंसने से घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>धूप निकलने के बाद स्थिति और भी गंभीर हो जाती है&period; सड़क पर जमी सूखी मिट्टी और धूल भारी वाहनों के गुजरते ही हवा में उड़ने लगती है&period; धूल का घना गुबार कई सौ मीटर तक फैल जाता है&comma; जिससे वाहन चालकों की दृश्यता कम हो जाती है&period; राहगीरों&comma; दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है&period; धूल घरों&comma; दुकानों और प्रतिष्ठानों के अंदर तक पहुंच रही है&period; स्कूली बच्चों&comma; बुजुर्गों और दमा के मरीजों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी डायवर्सन की नियमित मरम्मत नहीं करा रही है&period; गड्ढों की भराई नहीं की जा रही और धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव भी नियमित रूप से नहीं होता&period; इससे लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लोगों ने जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी से मांग की है कि डायवर्सन को तत्काल समतल और सुरक्षित बनाया जाए&comma; बड़े-बड़े गड्ढों की मरम्मत कराई जाए तथा धूल रोकने के लिए दिन में कई बार पानी का छिड़काव कराया जाए&period; उनका कहना है कि जब तक एलिवेटेड सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो जाता&comma; तब तक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना और डायवर्सन का नियमित रखरखाव जरूरी है&comma; ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।<&sol;p>&NewLine;

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